मेनका गाँधी पायल सोढ़ी चंडीगढ़ की एक कुशाग्र और व्यावहारिक लड़की है और किसी भी प्रकार की हिंसा को बर्दाश्त नहीं कर सकती है। तीन माह पहले उसने एक काले रंग के नवजात बकरे को पाया जिसकी माँ को उसकी आँखों के सामने ही काटा गया था।
वह उस बकरे को आश्रय में ले गई। उसके पास बकरियों का कोई बाड़ा नहीं था, इसलिए उसने उस बच्चे को खरगोशों के बीच में रख दिया तथा बोतल से उसका पोषण करने लगी।
| | यह कितना विचित्र है कि हम अपने कुत्तों को इतना महत्व देते हैं किंतु बकरियों को खाने से पूर्व एक बार भी नहीं सोचते हैं जबकि उन्हें समूचे विश्व में पालतू पशुओं के रूप में रखा जाता है और जो कुत्ते की तरह ही बुद्धिमान, वफादार तथा भावुक होती हैं |
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कालू यह सोचते हुए बड़ा हुआ कि वह एक खरगोश है। जब अंततः वह उनसे अलग हुआ तो बहुत रोया और अब भी वह मौका मिलते ही खरगोश के परिवार के साथ खेलने के लिए उनके बाड़े में पहुँच जाता है। तथापि वह पायल पर अपना काफी अधिकार समझता है और जब पायल अन्य व्यक्तियों से बात करती है तो वह थोड़ी देर के लिए रुकता और फिर थोड़ी देर बाद गुस्सा दिखाने लगता है।
उसे सजा देने के लिए पायल कहीं पर छुप जाती है तथा वह पूरे आश्रय में उसकी खोज करेगा और उसे ढूँढ लेने पर वह प्यार से उन्हें कुतरने तथा सिर से धक्का देने लगता है। अब पायल एक और बकरी को लाई, जो है तो मादा परंतु कालू को उसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। यदि पायल नई बकरी फिफ्टी को छूती है तो कालू उदासीन होकर उसके हाथों को हटा देता है।
यह कितना विचित्र है कि हम अपने कुत्तों को इतना महत्व देते हैं किंतु बकरियों को खाने से पूर्व एक बार भी नहीं सोचते हैं जबकि उन्हें समूचे विश्व में पालतू पशुओं के रूप में रखा जाता है और जो कुत्ते की तरह ही बुद्धिमान, वफादार तथा भावुक होती है।
बकरियों को अक्सर उनके बुद्धिमान तथा स्नेही जीव होने का श्रेय नहीं दिया जाता है। उन्हें कुत्तों की तरह ही मानें सिवाय इसके कि उनमें कुत्तों की 'मुझे मनुष्य को खुश करना है' वाली विशेषता नहीं होती है।
मानव के बच्चों को ऐसे ही 'किड्स' नहीं कहा जाता है। इसका अर्थ बकरी का बच्चा भी होता है। बकरी के बच्चों को लुका-छिपी खेलना अच्छा लगता है। वे छोटे से छिद्रों में घुसकर वहाँ शांत होकर लेटे रहते हैं और जब आप उन्हें ढूँढ लेंगे तो वे खुशी से उछलने लगते हैं। वे मानव के बच्चों की तरह ही चीजों को 'चबाकर' और 'मुँह में डालकर' उनके बारे में जानते हैं और अपने मुँह से 'संसार का पता लगाते' है। उन्हें ऊँचाई पर चढ़ना अच्छा लगता है।
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