मुख्य पृष्ठ > सामयिक > विचार-मंथन > विचार-मंथन
सुझाव/प्रतिक्रिया मित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
कुछ नुक्‍ताचीनी हो जाए
ब्‍लॉग चर्चा में आज देबाशीष की ब्‍लॉग नुक्‍ताचीनी
WD
निरंतर - निरंतर विश्‍व की पहली ब्‍लॉग मैगजीन है, जिसका प्रस्‍थापना और प्रकाशन देबाशीष ने किया। इसमें विश्‍व भर के सामाजिक-आर्थिक मसलों, साहित्‍य और विज्ञान-तकनीक आदि के बारे में लेख होते हैं

सुर्खियाँ - यहाँ रोजमर्रा के समाचारों की सुर्खियाँ आपको मिल जाएँगी। हिंदी-अँग्रेजी के प्रमुख अखबारों की सुर्खियाँ यहाँ प्रकाशित की जाती हैं

WD
पॉडभारती - यह विश्‍व की पहली हिंदी पॉडजीन है, जिसकी शुरुआत देबाशीष ने की। शशि सिंह इस काम में उनके सहयोगी रहे


देबाशीष के ब्‍लॉग पर तकनीक की दुनिया से जुड़ी नई खबरों को देखा जा सकता है। आसपास के मुद्दों पर भी वे सवाल खड़े करते हैं। यदि आप हिंदी ब्‍लॉग की दुनिया के बारे में अपडेट रहना चाहते हैं तो नुक्‍ताचीनी से बेहतर ठिकाना शायद दूसरा नहीं हो सकता है। ब्‍लॉग और तकनीक की दुनिया में वे नए-नए सवाल भी खड़े करते रहते हैं। समसामयिक विषयों, राजनीति इत्‍यादि के बारे में टिप्‍पणियाँ भी नुक्‍ताचीनी में देखी जा सकती हैं। देबाशीष कहते हैं कि साहित्‍य मेरा इलाका नहीं है। फिर भी उन्होंने हिंदी ब्‍लॉग के लेखन और जिन विषयों और सवालों को यहाँ प्रमुखता दी जा रही है, उसके बारे में काफी बात की।

WD
देबाशीष कहते हैं कि हिंदी साहित्‍य की तरह ब्‍लॉग की दुनिया में भी एक किस्‍म का ध्रुवीकरण और दलवाद दिखने लगा है। सब अपने-अपने दल बनाकर उसके भीतर काम कर रहे हैं। किसी विमर्श की शुरुआत करते हुए वह स्‍वस्‍थ तरीके से नहीं चल पाती और व्‍यक्तिगत आलोचना और ‍िछछालेदर पर उतर आती है। बहसों का अंत हमेशा बहुत बुरा होता है।

हिंदी की यह स्थिति चाहे वह साहित्‍य में हो या ब्‍लॉग की दुनिया में, वास्‍तव में काफी चिंताजनक है। अँग्रेजी या अन्‍य भाषाओं में ऐसा नहीं होता। हमें ब्‍लॉगिंग को इस तरह के विवादों से बचाने की जरूरत है और स्‍वस्‍थ विमर्शों के लिए नए प्‍लेटफॉर्म बनाने की जरूरत।

WD
लेकिन ब्‍लॉग के माध्‍यम से नए रूपों में हिंदी के विकास को लेकर देबाशीष भी कम आशान्वित नहीं हैं। हालाँकि कोरी भावुकता की जगह वे काफी तार्किक तरीके से मुद्दों पर विचार करते हैं और कहते हैं कि हिंदी का विकास तब होगा, जब वास्‍तव में उसका अधिकाधिक इस्‍तेमाल हो, वह ज्‍यादा व्‍यापक पैमाने पर लोगों तक पहुँचे। हिंदी में उम्‍दा साहित्‍य रचा और पढ़ा जाए। जब लोग अपनी जबान में बात करें

देबाशीष कहते हैं कि विज्ञान और तकनीक के विकास ने बहुत से नए रास्‍ते खोले हैं, जिनका ठीक-ठीक रूप में इस्‍तेमाल करना हमारी जिम्‍मेदारी है। एक सार्थक प्रयोग ब्‍लॉग को बहुत महत्‍वपूर्ण और क्रांतिकारी माध्‍यम बना सकता है। विधि, कानून, स्‍वास्‍थ्‍य, पर्यावरण, विज्ञान और तकनीक के बारे में और लिखा जाए। हिंदी अपने सीमित संसार से ऊपर उठे और बड़े फलक पर देखना शुरू करे। फिलहाल आप देबाशीष के ब्‍लॉग पर जाएँ और अपनी तकनीकी और अन्‍य जानकारियाँ बढाएँ।

ब्‍लॉग - नुक्‍ताचीनी
URL - http://nuktachini.debashish.com/
 << 1 | 2   
और भी
भ्रष्टाचार और नैतिकता पर खुलकर बात करें !!
हे माधव! अब कौन बचाएगा 'द्रौपदी' को
ब्‍लॉग-चर्चा का एक पहलू यह भी
ब्‍लॉग-चर्चा
भूख को राक्षस बनने से रोकें
आकाशवाणी ने परोसी यादगार सामग्री