प्रेम और क्रोध पर देखिए फुरसतिया जी का विशद विमर्श -
आचार्य शुक्लजी ने लिखा है- गुस्सा बहुत फ़ुर्तीला मनोविकार है। हमें उनकी बात पर यकीन सा होता दिखता है। गुस्सैल लोगों की फ़ुर्ती देखकर चकित रह जाना पड़ता है। लोग जरा-जरा सी बात पर गुस्सा करके फ़ुर्ती से दूसरे की इज्जत उतार देते हैं। अमेरिका को इराक पर गुस्सा आया और उसने फ़ुर्ती से उसे पटरा कर दिया।
क्रोध का सम्बंध केवल पटरा करने से ही नहीं है। प्यार करने से भी है। प्यार करने वाले भी इसे जताने के लिए इस्तेमाल करते हैं। नायक लोग नायिकाऒं के गुस्से को हसीन कहते पाए गए हैं। यह सुनने वाली कुछ नायिकाएँ इस पर विश्वास कर लेती हैं और गाहे-बगाहे हसीन दिखने का प्रयास करती हैं।
लोग अपना प्रेम भी गुस्से के माध्यम से इसलिए प्रकट करते हैं क्योंकि वे फ़ुर्ती से इसे प्रकट करना चाहते हैं। जरा सी देर हो जाने पर कोई दूसरा प्रेम-प्रकट कर जाएगा। और प्रेम गली तो आपको पता ही है कि संकरी होती है। इसमें दो नहीं समा सकते।
इसके बाद और पढ़ने के लिए तो खुद फुरसत निकालकर फुरसतिया जी के ब्लॉग पर जाना होगा। इंटरनेट और हिंदी ब्लॉगिंग के भविष्य के बारे में बात करते हुए अनूप जी काफी उत्साहित और आशान्वित नजर आते हैं। वे कहते हैं कि हिंदी ब्लॉगों और ब्लॉग लिखने वालों की संख्या बहुत तेजी के साथ बढ़ रही है। शुरू-शुरू में हिंदी ब्लॉगों की संख्या मात्र 30 के आसपास थी। फिर इस संख्या को 30 से 100 होने में तीन साल लग गए। लेकिन अब तो धड़ाधड़ ब्लॉग बन रहे हैं, नए-नए लोग ब्लॉग की दुनिया से जुड़ रहे हैं। ब्लॉग और ब्लॉग के माध्यम से हिंदी लेखन का भविष्य काफी उज्जवल है। तरह-तरह के पेशों से जुड़े हुए लोग ब्लॉग की दुनिया में आ रहे हैं और बहुत कुछ विविधतापूर्ण यहाँ लिखा जा रहा है।
अनूप जी कहते हैं कि वैसे तो ब्लॉग में काफी कुछ लिखा जा रहा है, लेकिन अधिकांश कुछ निजी किस्म की बातें, विचार और अनुभव हैं। इनका और भी विस्तार होना चाहिए और तरह-तरह की नए कलेवर वाली चीजें भी आनी चाहिए। डायरी, यात्रा वृतांत, संस्मरण और विज्ञान-इतिहास आदि से संबंधित विषयों पर भी भरपूर लेखन होना चाहिए। पत्रकारिता के बारे में भी लिखा जाना चाहिए।
अनूप जी कहते हैं कि ब्लॉग की जो ताकत है, वही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी है। जो उसका सामर्थ्य है, वही सबसे बड़ी सीमा भी है। आपकी कही हर बात, अच्छी या बुरी, सकारात्मक या नकारात्मक तत्काल अभिव्यक्त होती है और उस पर तत्काल प्रतिक्रिया भी हो जाती है। यह हमेशा ही बहुत सकारात्मक नहीं होता। लेकिन यही ब्लॉग की खासियत है और यही ब्लॉग की कमजोरी है।
इतना सब पढ़ने के बाद भी आप फुरसतिया के लिए फुरसत नहीं निकालें, ये तो हो ही नहीं सकता। फुरसत से पढ़ें उन्हें, ताकि वे और भी फुरसत से लिखें, अपनी मौज में, अपने प्रवाह में।
ब्लॉग - फुरसतिया URL - http://hindini.com/fursatiya/
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