जीवन के किसी-न-किसी मोड़ पर हम सभी अपने देश और समाज के साथ एक बंधन महसूस करते हैं। एक ऐसा दायित्वपूर्ण बंधन, जो समाज को वह सब लौटाना चाहता है, जो उसने उस समाज से पाया है। वह समाज जिसने हमारा निर्माण किया, हमें उन्नत किया और हमारी प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया।
यह एक अमूर्त-सी भावना है, जो हर व्यक्ति के मन में होती है, लेकिन उसे सही अभिव्यक्ति नहीं मिल पाती।
ऐसे ही एक व्यक्ति थे, जिन्होंने अपनी इन भावनाओं को गुमनामी के अँधेरे में नहीं खो जाने दिया। उन्होंने गहरे आत्मविश्वास और समर्पण के साथ उस भावना को अभिव्यक्ति दी और आज वे 'गिव इंडिया' जैसी संस्था के संस्थापक के रूप में जाने जाते हैं।
वेंकट कृष्णन अहमदाबाद के मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के विद्यार्थी थे। अपार धन और सफलता उनके रास्ते में सजे हुए थे, लेकिन उनकी आँखों में दूसरे ही सपने तैर रहे थे। उन्होंने निर्धन और अभावग्रस्त लोगों की सेवा का मार्ग चुना। यह मार्ग संपत्ति और सफलता के रास्ते की तुलना में कठिन था, लेकिन उन्हें यही रास्ता प्रिय था।
श्री वेंकट कहते हैं कि एक साधारण मैकेनिक के बुद्धिमान बेटे को उच्च अध्ययन की सुविधा क्यों नहीं मिलनी चाहिए, जबकि एक अमीर बाप का औसत बेटा वह सबकुछ हासिल कर सकता है। यह विचार 'गिव इंडिया' के पीछे मुख्य प्रेरणा बने, जिसने 1999 में एक ठोस रूप ग्रहण किया।
गिव इंडिया के माध्यम से लोग जरूरतमंद लोगों की सहायता कर सकते हैं। यह संस्था उन लोगों को एक जमीन मुहैया कराती है, जिसकी सहायता से लोग समाज के प्रति अपना दाय चुका सकते हैं, अपने दायित्व निभा सकते हैं।
गिव इंडिया किसी निजी लाभ के उद्देश्य से चलने वाली संस्था नहीं है। गिव इंडिया लोगों को एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवाती है, जिसके माध्यम से कोई समाज-सेवा के लिए अपना धन प्रदान कर सकता है। गिव इंडिया अपनी विश्वसनीयता और पारदर्शिता के लिए जानी जाती है। वे अपने लिए नहीं, बल्कि अन्य गैर सरकारी संस्थाओं की मदद के लिए धन एकत्रित करते हैं। गिव इंडिया एक फीडबैक रिपोर्ट भी प्रदान करती है, जिसमें किसी व्यक्ति द्वारा संस्था को दिए गए धन का पूरा विवरण विस्तार से दिया गया होता है। इच्छुक व्यक्ति न्यूनतम 750 रु. प्रतिमाह के हिसाब से 6 महीने तक किसी बच्चे की पढ़ाई का खर्च उठा सकते हैं। गिव इंडिया के पास किसी व्यक्ति द्वारा खर्च किए गए धन का पूरा बारीक हिसाब रखा जाता है।
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