‘एक दिन एक ऐसे रिश्तेदार का आना हुआ, जिनके पास कई साल से फ्रिज़ था। उन्होंने फ्रिज़ खोल दिया। उसमें सिर्फ बोतल भरी थी। बर्तन-कटोरे में पानी था। वो हँसने लगे। बोले, आप लोगों को फ्रिज़ में क्या रखा जाता है, यही नहीं मालूम। उन्हें हम पर हँसने की आदत थी। सो बुरा लगा। फ्रिज़ का नहीं होना एक सामाजिक-आर्थिक अंतर था, मगर फ्रिज़ में किसी चीज़ का नहीं होना अलग सामाजिक आर्थिक अंतर। फ्रिज के खालीपन ने हमारी हैसियत एक बार फिर तय कर दी। या गिरा दी। हम सब आहत थे। ताजा खाना खाने वाले हम सब फ्रिज़ की गोद भऱने के लिए कुछ-कुछ बचाने लगे।’
हिंदी ब्लॉगों की दुनिया का निरंतर विस्तार हो रहा है। नए-नए लोग जुड़ रहे हैं और बहुत कुछ लिखा जा रहा है। रवीश इन सबको लेकर काफी उत्साहित हैं। उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक ने हमें एक बहुत शानदार माध्यम प्रदान किया है, और इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर लोगों तक अपनी बात पहुँचाने और कुछ सार्थक बहसों और विमर्शों का सूत्रपात करने के लिए किया जाना चाहिए।
रवीश कहते हैं कि ब्लॉग में आपके ऊपर कोई सेंसरशिप नहीं होती, कोई आपके लिखे में काट-छाँट नहीं करता। आप खुद ही अपने मालिक हैं, अपने संपादक हैं। आपको कोई आदेशित करने वाला नहीं कि ये करो, वो न करो। किसी की जी-हुजूरी की जरूरत नहीं। इस स्पेस में आप बिल्कुल आजाद हैं, अपने तरीके से जीने के लिए। | हिंदी ब्लॉगों की दुनिया का निरंतर विस्तार हो रहा है। नए-नए लोग जुड़ रहे हैं और बहुत कुछ लिखा जा रहा है। रवीश इन सबको लेकर काफी उत्साहित हैं। उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक ने हमें एक बहुत शानदार माध्यम प्रदान किया है। |
| |
ब्लॉगिंग को लेकर रवीश का जोश देखते बनता है। उनका मानना है ब्लॉगिंग के माध्यम से हिंदी भाषा का विस्तार होगा और हिंदी में नए अच्छे लेखक भी पैदा होंगे। प्रिंट मीडिया में अब नए लेखकों को पैदा करने की ताकत नहीं बची है, लेकिन ब्लॉग उस अभाव को पूरा करेंगे। यहाँ तक की ब्लॉग साहित्यिक पत्रिकाओं का भी स्थान ले सकते हैं। रवीश हिंदी ब्लॉगिंग को लेकर काफी आशान्वित हैं, हालाँकि उसके खतरों पर भी निगाह रखते हैं।
मोहल्ला, अजदक और अनामदास का पोथा रवीश के पसंदीदा ब्लॉग हैं। रवीश कहते हैं कि अभी तक हिंदी ब्लॉगिंग में अधिकांश निजी और संस्मरणात्मक चीजें ही लिखी जाती रही हैं, जबकि ऐकेडमिक बातों को भी यहाँ स्पेस मिलना चाहिए। इतिहास के गंभीर विषयों पर उम्दा लेखकीय सामग्री, तथ्य, विचार और घटनाएँ ब्लॉग में आने चाहिए। इससे ब्लॉग की व्यापक सामाजिक उपयोगिता बढ़ेगी और ज्ञान की उपलब्धता भी।
‘कस्बा’ के माध्यम से रवीश का सफर जारी है। एक ऐसा सफर, जिसने हिंदी ब्लॉगिंग को एक दिशा और सार्थकता प्रदान की है। ढेरों लोग इस सफर के साथी हैं। कस्बे की बसाहट और चमक-दमक बढ़े, लोगों की आवाजाही बढ़े, ऐसी उम्मीद की जानी चाहिए।
ब्लॉग - कस्बा URL - http://naisadak.blogspot.com/
|