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बिल गेट्स का नया पूँजीवाद
दिलीप चिंचालकर
भारत में हो या अमेरिका में, रईस परिवारों के बिगड़ैल बच्चों के लिए अपनी सनक के पीछे अच्छे-भले कॉलेज की पढ़ाई छोड़ देना गैरमामूली नहीं है। यह एक अमेरिकी युवा था।

लंबी सुनहरी लटें जिसकी आँखों पर झूलतीं, मुस्कान सदा चेहरे पर खिलती और भूरे शीशों के पीछे से झाँकती नजर में शरारत के साथ बुद्धिमत्ता भी छलकती- आखिर वह हार्वर्ड विश्वविद्यालय का छात्र जो था।

एक बार देर रात को बिना लाइसेंस अपने मित्र की मोटर कार चलाते पकड़े जाने पर उसने एक रात जेल में भी काटी थी। फिर एक बार जब विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने उसे होस्टल से अपना कारोबार चलाते पाया तो उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की। तब बगावती बिल गेट्स ने कॉलेज की पढ़ाई से नमस्ते कर ली।

वह बात थी सन्‌ 1977 की, जब कायदे से बिल को 22-23 वर्ष की आयु में कॉलेज की डिग्री ले लेनी चाहिए थी, लेकिन तब उन्होंने डिग्री नहीं ली। 51 वर्ष का हो जाने के बाद अभी इसी महीने के पहले सप्ताह में हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने बिल को न्योता देकर बुलाया और उसे डॉक्टर की मानद् उपाधि दी।

दुनिया जानती है कि बीच के तीन दशकों में जितना पानी दुनिया की तमाम नदियों से बहा होगा, उतनी ही जानकारी और सूचनाएँ बिल गेट्स के माइक्रोसॉफ्ट आविष्कारों से प्रवाहित हुई होंगी। सत्तर के दशक में हार्वर्ड का छात्र होना बिल गेट्स का पहला वर्शन था। बिल 2.0 वह है जिसे पूरी कम्प्यूटर शिक्षित दुनिया जानती है। या यों कहिए कि उसने देहाती भी समझ सके, इतना कम्प्यूटर को सरल बनाया।

छोटी मछलियों को निगलने वाली बड़ी पूँजीवादी मछलियों का आदर्श यदि अमेरिकी पूँजीवाद है तो अब उसके सफलतम व्यवसायी का नया मंत्र है सृजनात्मक पूँजीवाद- बाजार में अपनी शक्ति का उपयोग छोटी से छोटी मछली को फायदा पहुँचाने में हो।
बिल के इन दोनों संस्करणों में उसकी तीक्ष्ण बुद्धि, पढ़ाकूपन और एक किस्म की असामाजिकता है जिसके लिए अमेरिकी बोलचाल की भाषा में एक शब्द है 'नर्ड'। शायद इन्हीं के कारण वह सामान्य सोच से ऊपर उठकर सब कुछ डिजिटल स्पष्टता के साथ देख सका।

कॉलेज के शुरुआती दिनों में ही बिल और उसके दोस्त पॉल एलन (माइक्रोसॉफ्ट का सीईओ) ने माइक्रोप्रोसेसर से होने वाली क्रांति की आहट पा ली थी। वे नहीं चाहते थे कि वह उनकी हिस्सेदारी के बगैर ही संपन्न हो जाए। इसलिए अनुशासनात्मक कार्रवाई के बहाने औपचारिक शिक्षा से मिली आजादी को भुनाते हुए वे आकार लेती उस लहर पर सवार हो गए।
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