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पाठकों के पत्र (प्रतिक्रियाएँ)
वेबदुनिया का पहले वाला रूप ज्‍यादा अच्‍छा था। इस रूप में रंग और फॉन्‍ट, दोनों ही पहले जैसे नहीं हैं। नए अक्षरों का आकार भी छोटा है और इसे पढ़ने में दिक्‍कत होती है।

सिंधु शर्मा (sindhu.sharma@gmail.com)


वेबदुनिया के कायाकल्‍प पर आपकी पूरी टीम को ढेर सारी बधाइयाँ। पुरानी वेबसाइट में व्यंजन में ज्यादा संख्‍या में रेसिपी दी हुई थी। इसमें उतनी नहीं है। अगर आप इनकी संख्‍या बढ़ा सकें तो बहुत अच्‍छा होगा।

सविता एस. शिरके (savisandesh@yahoo.com)


वेबदुनिया के नए प्रारूप पर आपको ढेर सारी बधाइयाँ। आपकी टीम बहुत परिश्रम के साथ काम कर रही है। आप निरंतर प्रगति कर रहे हैं और अपने यूजर्स को ढेर सारी पठनीय सामग्री के साथ-साथ अन्‍य सुविधाएँ भी प्रदान कर रहे हैं। पूरे वेबदुनिया परिवार को मेरी ओर से बहुत सारी बधाइयाँ।

महेश कुमार शाह (chithi3@epatra.com)

मैं त्‍योहारों के बारे में हिंदी में कुछ अच्‍छी कविताएँ पढ़ना चाहती हूँ। क्‍या आप हिंदी में त्‍योहारों के ऊपर कुछ कविताएँ देंगे।

श्रुति (nishirakeshgupta@rediffmail.com)





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और भी
आपकी नई वेबदुनिया…
पाठकों के पत्र (प्रतिक्रियाएँ)
आँखें, जो मौत के बाद भी देख रही हैं दुनिया
प्रारंभ और अंत के बीच
उन्हें अपने अंत का आभास था
हल की ओर सर क्रीक विवाद