मुख्य पृष्ठ  सामयिक  आलेख  विचार-मंथन
 
पाठकों के पत्र (प्रतिक्रियाएँ)
वेबदुनिया का नया रंग-रूप बहुत ही अच्‍छा है। लेकिन पहले की तुलना में सामग्री कुछ कम हो गई है। वेबदुनिया का मकसद विश्‍व भर में हो रही घटनाओं को तत्‍काल अपने पाठकों तक पहुँचाना रहा है और ये काम आपने बखूबी किया भी। लेकिन अब इसमें कुछ कमी आती दिख रही है। कृपया इस ओर ध्‍यान दें।

अब्‍दुल रज्‍जाक (aaspass@yahoo.co.in)


मेरा नाम सिमरन है और मैं अमेरिका में रहती हूँ। वेबदुनिया का पिछला रंग-रूप काफी खूबसूरत और आकर्षक हुआ करता था। नया प्रारूप उसके निकट नहीं लगता है। साथ ही धर्म-दर्शन वाले हिस्‍से में पहले जितनी जानकारियाँ थीं, अब उतनी नहीं हैं। उसमें बहुत-से महत्‍वपूर्ण मंत्र और श्‍लोक इत्‍यादि हुआ करते थे। मैं हमेशा उन्‍हें पढ़ती थी। यदि संभव हो तो उसे पुन: देने का कष्‍ट करें।

सिमरन (singhr03@yahoo.com)

महोदय,
वेबदुनिया का नया रूप बहुत मोहक और आकर्षक है। इसके लिए आपको ढेरों-ढेर बधाइयाँ। लेकिन इसमें अपना मंच या अपनी रचनाएँ भेजने के लिए कोई लिंक नजर नहीं आ रहा है।

रोहित कुमार 'हैप्पी' (editor@bharatdarshan.co.nz)


आपने चीनी कमकी बहुत अच्‍छी समीक्षा की है। फिल्म का एक संदेश यह भी है कि प्रेम मात्रा, आयु या अवधि से नहीं, बल्कि अपनी गहराई से आँका जाना चाहिये और प्रेम में ये सारी सीमाएँ या बंधन कोई मायने नहीं रखते हैं।
अशोक मनवानी (ashok_manwani@yaoo.co.in)
1| 2| 3
और भी
आपकी नई वेबदुनिया…
पाठकों के पत्र (प्रतिक्रियाएँ)
आँखें, जो मौत के बाद भी देख रही हैं दुनिया
प्रारंभ और अंत के बीच
उन्हें अपने अंत का आभास था
हल की ओर सर क्रीक विवाद