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पाठकों के पत्र (प्रतिक्रियाएँ)
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वेबदुनिया की नई सज-धज के साथ आपका प्रिय स्‍तंभ 'पाठकों के पत्र' भी एक बार फिर नए रूप-रंग में प्रस्‍तुत है। इसके माध्‍यम से आप अपनी प्रतिक्रियाएँ प्रेषित कर सकते हैं, जिन्‍हें हम साप्‍ताहिक रूप से प्रकाशित करेंगे। आप न्‍यूनतम 50 और अधिकतम 100 शब्‍दों में अपनी प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त कर सकते हैं। - संपादक

हमें वेबदुनिया का यह नया प्रारूप बहुत अछा लगा। आपकी नि:शुल्‍क मेल सेवा भी बहुत अच्‍छी और उपयोगी है। साथ ही ज्योतिष के बारे में आप जिस तरह की जानकारी दे रहे हैं, वो बहुत महत्‍वपूर्ण और लाभप्रद है। वेबदुनिया की खबरें भी बहुत स्‍तरीय और विश्‍वसनीय होती हैं।

विजेंद्र दुगेसर (vijendersinghdugesar@webdunia.com)


वेबदुनिया का यह नया डिजाइन और रंग-रूप तो वाकई काबिल-ए-तारीफ है। जिस तरह से आप लगातार खबरों को अपडेट कर रहे हैं और इस पर निरंतर कार्य कर रहे हैं, उससे तो यही लगता है कि हिंदी वेबसाइट की दुनिया में वेबदुनिया गूगल से किसी मायने में कम नहीं है. इसके लिये आपकी पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाइयाँ। इसे यूँ ही जारी रखें। वेबदुनिया का भविष्‍य बहुत ही उज्ज्वल है.

इनाम मुहम्मद (inam.md@gmail.com)


वेबदुनिया को यूनिकोड में परिवर्तित करने के बाद से अब वह मुख्यधारा से जुड़ गया है और इससे हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं के प्रसार में तीव्रता आएगी।
बहुत-बहुत शुभकामनाएँ।

रोहित कुमार हैप्‍पी (editor@bharatdarshan.co.nz)


वेब दुनिया का नया रूप उत्तम है, परन्तु पुराना रूप भी याद आता है। धर्मदर्शन पर आलेख और तंत्र-मंत्र व चिकित्सा से संबंधित सामग्री पहले जितनी थी, अब उतनी नहीं है। कृपया फिर से उतनी ही और वैसी ही सामग्री प्रदान करने का कष्‍ट करें।

सुमन लोलाशी (suman@aquamall.co.in)


वेबदुनिया का नया रंग-रूप बहुत अच्‍छा और तारीफ लायक है। लेकिन अब पहले से सामग्री कुछ कम लग रही है। पुराने वाले पोर्टल पर इस्‍लाम धर्म के बारे में ढेर सारी जानकारियाँ थीं, लेकिन अब वैसा कुछ भी नहीं है। कृपया वो सारी जानकारियाँ पुन: प्रदान करने का कष्‍ट करें।

मोहम्‍मद तारिक (sahilsahil_2003@yahoo.com)


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और भी
आपकी नई वेबदुनिया…
पाठकों के पत्र (प्रतिक्रियाएँ)
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प्रारंभ और अंत के बीच
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हल की ओर सर क्रीक विवाद