|
मेरा नाम राज है और मैं जमशेदपुर से आपको यह खत लिख रहा हूँ। पिछले एक वर्ष से मैं वेबदुनिया का नियमित पाठक हूँ। वेबदुनिया में सेहत नामक कॉलम में पहले स्वास्थ्य संबंधी ढेरों सूचनाएँ हुआ करती थीं। आयुर्वेद पर भी ढेर सारी जानकारी थी। लेकिन अब सेहत के कॉलम में ये सारी जानकारियाँ नहीं हैं। आपसे विनम्र निवेदन है कि कृपया यह समस्त जानकारियाँ पुन: प्रकाशित करें। राज (raj_ukindia@yahoo.com) आप लोग बहुत ही प्रशंसनीय काम कर रहे हैं। भारतीय भाषाओं के माध्यम से आप लोगों को आपस में जोड़ने का काम कर रहे हैं। एक सुझाव है कि आप और बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के समाचार अपने पोर्टल पर प्रकाशित करें। वैसे आपका प्रयास सचमुच ही बहुत सराहनीय है।वंदना परीक (g_pareek@yahoo.com) हमारे समय की फिल्में पुराने समय के जैसी नहीं रहीं। यह भारत का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं। पुरानी फिल्मों में ही भारतीयता की झलक मिलती है। इतने अच्छे लेख के लिए ढेरों बधाइयाँ। वेबदुनिया बहुत ही महत्वपूर्ण काम कर रहा है।सुधाकर मिश्रा (sudhakar_mishra@webdunia.com) डिंपल के जैसा कोई नहीं है। 50 के पार भी उनकी खूबसूरती कायम है और उनकी अदाकारी तो लाजवाब है। उनके जन्मदिन पर इस विशेष आयोजन के लिए आपको ढेरों बधाइयाँ। वेबदुनिया का नया रंग-रूप भी काबिल-ए-तारीफ है। मुकेश (mukeshm00@yahoo.com) वेबदुनिया और साथ ही बहस वाला कॉलम अत्यधिक मनमोहक और सुंदर हो गये हैं। मैंने आपके आलेखों पर अपने विचार प्रेषित किए हैं। आशा है, भविष्य में और भी बेहतरीन सामग्री वेबदुनिया पर मिल सकेगी। आपको ट्रक भरकर लाखों-लाख बधाइयाँ और समस्त शुभकामनाएँ।- धनराज वाधवानी (DWadhwani@webdunia.com) संपादक जी, वेबदुनिया दिनोंदिन बेहतरीन होता जा रहा है। आज तो अजातशत्रु के लेख की लिंक ने मालामाल ही कर दिया. साहिर साहब पर मैंने हाल ही में एक टिप्पणी भेजी थी और आज ही साहिर के गीत ‘तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ है तुमको’ पर अजातशत्रु जी को पढ़ने का मौका मिला। आपको और वेबदुनिया परिवार को ढेर सारी बधाइयाँ। यदि समय और आपकी सहमति रही तो वेबदुनिया के लिये लिखना चाहूँगा। अशेष शुभ-भाव।संजय (sanjaypatel1961@gmail.com)
|