डॉयचे वेले समाचार
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कोलकाता से दिल्ली की राह यूपी से होकर जाती है लेकिन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी अपने पूरे राजनीतिक करियर में कभी भी लखनऊ नहीं गए। भारत का प्रथम नागरिक बनने के लिए वे नवाबों की नगरी को नजरअंदाज नहीं कर पाए।

वह पहली बार लखनऊ पहुंचे और गदगद वापस होकर गए। उत्तर प्रदेश में उन्हें सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष का भारी समर्थन मिल रहा है। लखनऊ की मेहमान नवाजी ने उनका मन मोह लिया। उनके चेहरे के भाव ऐसे थे कि मानो उन्होंने लखनऊ पर दस्तक देकर दिल्ली जीत ली हो। चलते चलते वह सभी को थैंक यू इस तरह कह रहे थे जैसे कह रहे हों, 'लखनऊ हम पर फिदा और हम फिदाए लखनऊ।'

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लखनऊ जाना उनकी मजबूरी तो नहीं कहा जा सकता क्योंकि वह सभी राज्यों का दौरा कर रहे हैं, पर लखनऊ के बिना उनका काम बनता नजर नहीं आ रहा था। कारण साफ है कि यूपी देश का सबसे बड़ा राज्य है और वहां के एक विधायक के वोट का मूल्य 208 और सांसद के वोट का मूल्य 708 है। पूरे देश में यूपी के विधायकों और सांसदों के वोटों की कीमत सबसे अधिक है। राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल में कुल वोटों में यूपी का योगदान 14 फीसदी से ज्यादा है। राष्ट्रपति के चुनाव के लिए पड़ने वाले लगभग 11 लाख में से 2 लाख वोट यूपी से ही पड़ते हैं।

हिसाब लगाया जाए तो यूपी के बगैर सर्वसम्मति से किसी का भी राष्ट्रपति बनना संभव नहीं लगता। शायद यही वजह है कि प्रणब मुखर्जी जैसे दिग्गज राजनीतिज्ञ को भी अपने करियर के अंतिम पड़ाव की पूर्व संध्या पर लखनऊ जाना पड़ा है। इस हिसाब से देखा जाए तो लखनऊ के विधायकों और सांसदों की मान मुनव्वल होनी चाहिए थी, लेकिन हुआ इसके बिलकुल उलटा।

यूपी देश का इकलौता राज्य हो गया है जहां की लगभग सारी पार्टियां प्रणब मुखर्जी के साथ खड़ी नजर आ रही हैं। 225 विधायकों वाली सत्ताधारी समाजवादी पार्टी, 80 विधायकों वाली मुख्य विपक्षी पार्टी बीएसपी, आधा दर्जन विधायकों के साथ केंद्र में नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह के नेतृत्व वाली आरएलडी, चार विधायकों वाली पीस पार्टी, दो विधायकों वाला कौमी एकता दल, एक विधायक के साथ अपना दल, निर्दलीय विधायक लेकिन यूपी के जेल मंत्री राजा भैया समेत 25 विधायकों वाली कांग्रेस और सारे निर्दलीय भी।

बंगाली व्यंजनों की खुशबू : इसे यूपीए के रणनीतिकारों का करिश्मा कहा जा रहा है कि यूपी की लगभग सभी पार्टियां प्रणब दा का समर्थन कर रही हैं। यही वजह थी कि दिन में प्रणब मुखर्जी ने समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव और यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ लंच लिया तो शाम को कांग्रेस के विधायकों के साथ चाय पार्टी में शामिल हुए और रात में बीएसपी प्रमुख मायावती के साथ डिनर में शिरकत की। केन्द्रीय मंत्री राजीव शुक्ल, सलमान खुर्शीद, आरपी एन सिंह और श्री प्रकाश जायसवाल हर जगह उनके साथ साए की तरह मौजूद रहे।

प्रणब मुखर्जी की इतनी जबरदस्त खातिरदारी पर बीजेपी के प्रवक्ता विजय पाठक ने कहा कि केंद्र सरकार में बैठे कांग्रेस के नेता किसी भी हद तक जाकर अपने प्रत्याशी को जिताने में लगे हुए हैं। ये लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा के खिलाफ है।

प्रणब मुखर्जी के लिए समाजवादी पार्टी ने जो लंच दिया उसमें अवधी व्यंजनों के बजाए बंगाली फिश फ्राई, माछेर झोल, चिकन-मटन, जलेबी, रबड़ी के साथ ख़ास तौर पर कुल्हड़ों में बंगाली मिष्टी दोई परोसी गई। बीएसपी ने भी दादा की खातिरदारी में कोई कसर नहीं छोड़ी और माछेर भात, आलू पोस्तो, रोसोगोल्ला के साथ अवधी वेज और नान वेज व्यंजन परोसे। इन दावतों में समाजवादी पार्टी और बीएसपी के अलावा कांग्रेस के लगभग सभी नेता मौजूद रहे इसलिए उन्हें दादा को भोजन कराने की चिंता ही नहीं करनी थी। दोनों दावतों के बीच चाय की चुस्कियों की एक औपचारिकता पूरी कर ली गई।
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आसान जीत का भरोसा : लखनऊ में सभी गैर बीजेपी दलों के दुलारे हो गए प्रणब मुखर्जी के लिए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा कि उन्होंने ही दादा का नाम राष्ट्रपति पद के लिए सुझाया था और वह भारी बहुमत से जीतेंगे। दूसरी तरफ उनकी मुख्य प्रतिद्वंदी बीएसपी प्रमुख मायावती ने दादा को आसान जीत का भरोसा दिलाया।

इन दोनों पार्टियों के अलावा दूसरे दलों का समर्थन पाकर गदगद यूपीए प्रत्याशी प्रणब मुखर्जी ने कहा कि जीत के लिए यूपी जरूरी है। उन्होंने ये भी कहा कि राष्ट्रपति पद की गरिमा का उन्हें पूरा अहसास है, राष्ट्रपति बनने पर पूरी इमानदारी से जिम्मेदारी निभाऊंगा।

उन्होंने बीएसपी को धन्यवाद देते हुए कहा, 'मैंने हमेशा डॉक्टर अम्बेडकर के बनाए संविधान की भाईचारे और समानता की भावना और धर्म निरपेक्षता की मूल भावना से काम किया है। आगे भी मेरी कोशिश होगी कि मैं इन मूल्यों का पालन करते हुए अपनी भूमिका निभाऊं।'

राष्ट्रपति के चुनाव के लिए देश के सभी निर्वाचित सांसद और विधायक वोट देते हैं। सांसदों और विधायकों के वोटों की कीमत निकाली जाती है। इसे निकालने के लिए एक फार्मूला है। पंजाब के वोटों की कीमत तय करनी है तो वहां की कुल आबादी (1971 की जनगणना पर आधारित) 13,551,060 है।

एक विधायक के वोट की कीमत निकालने के लिए पंजाब की जनसंख्या को विधायकों की संख्या 117 से भाग करना होगा। जो संख्या आए उसे 1000 से भाग करने पर एक विधायक के वोट की कीमत निकल आएगी। इसी तरह सांसद के वोट की कीमत निकलने के लिए सभी राज्यों के विधायकों के वोट को जोड़कर उसे लोकसभा के निर्वाचित 543 और राज्यसभा के 243 सांसदों की संख्या से विभाजित करना होगा।

इस समय लोकसभा के 543 सांसद हैं और राज्य सभा के 243 सांसद हैं। देश में कुल विधायक 4,120 हैं। कुल 4,120 विधायकों के वोटों की कीमत 5,49,474 है और कुल 776 सांसदों के वोटों की कीमत 5,49,408 है। वर्ष 2007 में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को 6,38,116 वोट मिले थे जबकि उनके प्रतिद्वंदी भैरों सिंह शेखावत को 3,31,306 वोट मिले थे।

रिपोर्ट : एस. वहीद, लखनऊ
संपादन: महेश झा
सौजन्य से - डॉयचे वेले, जर्मन रेडियो
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