कई सदियों से इंसान डेंगू बुखार से लड़ रहा है, लेकिन अब करोड़ों लोगों की जानें लेने वाली इस बीमारी पर काबू पाने का दावा किया जा रहा है। फ्रांस में एक टीका बना है तो ब्राजील में नए किस्म के मच्छरों का उत्पादन हो रहा है। सालों से शोध कर रहे ब्राजीली वैज्ञानिकों को पता चला है कि डेंगू के मच्छरों का सफाया मच्छर ही कर सकेंगे। इसके लिए डेंगू फैलाने वाली एडेस एजिप्टी मच्छर को जेनेटिक स्तर पर बदल दिया गया है। प्रयोगशाला में बने नर मच्छरों को बाहर प्रकृति में छोड़ा जाएगा जहां वे मादा मच्छरों से सहवास करेंगे। इन से पैदा हुए अंडों और उनसे निकले छोटे मच्छरों में एक बड़ी कमी होगी। वह यह कि इन मच्छरों की जिंदगी बेहद छोटी होगी और वह वयस्क होने से पहले ही मर जाएंगे और डेंगू के वायरस फैलाने में असफल रहेंगे। इन मच्छरों के उत्पादन के लिए एक खास फैक्ट्री का उद्घाटन ब्राजील के पूर्वोत्तर बाहिया राज्य में किया गया। प्रयोग के लिए बाहिया के दो शहरों में इन मच्छरों को छोड़ा गया। मंत्रालय का कहना है कि प्रयोग के बाद दोनों शहरों में मच्छरों की संख्या 90 प्रतिशत कम हो गई।ब्राजील में इस प्रयोग के नतीजे को देखने के लिए लोग उत्सुक तो हैं, लेकिन इस बीच फ्रांस में सनोफी नाम की कंपनी ने डेंगू के लिए नए टीके का विकास किया है। सनोफी ने एक बयान में कहा है कि 70 साल से इस बीमारी को रोकने के लिए शोध जारी है और अब इस नतीजे से शोध एक अहम पड़ाव पर पहुंचा है। एडेस एजिप्टी नस्ल के मच्छरों से फैलने वाले डेंगू को ब्रेकबोन फीवर को 'हड्डी तोड़' बुखार के नाम से भी जाना जाता है। दुनिया भर में तीन अरब लोग इस बीमारी का शिकार बन सकते हैं। वायरस की चार नस्लें डेंगू के लिए जिम्मेदार होती हैं और एक के खिलाफ टीका दूसरी नस्ल के इंफेक्शन से बचाने में कामयाब नहीं होता। सनोफी अपने टीके को एशिया और दक्षिण अमेरिका के दस देशों में 31,000 लोगों पर टेस्ट कर रहा है। सनोफी के टीके की दवा थाईलैंड में पाए जाने वाली इस वायरस की तीन नस्लों के खिलाफ एंटीबॉडी पैदा करती है। कंपनी ने कहा है कि अब वायरस की चौथी नस्ल के बारे में पता लगाया जा रहा है। हालांकि टीके को लेकर अब भी कई सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं। सनोफी ने अब तक नहीं बताया है कि इस टीके से किस हद तक बीमारी को रोका जा सकेगा। कंपनी से मिली जानकारी को अब वैज्ञानिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी जांच रहे हैं। सनोफी का कहना है कि वह इस साल नवंबर में अपने शोध के नतीजों को अमेरिका के एक सम्मेलन में प्रस्तुत करेगी। कंपनी में टीका विकास करने वाला विभाग, सानोफी पास्टर ने टीका उत्पादन के लिए फ्रांस में नई फैक्ट्री का ऐलान किया है और इसमें तीन करोड़ 50 लाख यूरो लगाए जाएंगे। उसका मानना है कि सालाना इस टीके की बिक्री से कंपनी को एक अरब यूरो का मुनाफा होगा। एमजी/ओएसजे(रॉयटर्स, एएफपी) सौजन्य से - डॉयचे वेले, जर्मन रेडियो