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मुख पृष्ठ » सामयिक » बीबीसी हिंदी » बीबीसी समाचार » 2012: खुद तारा बन गए नील, मिलेंगी नई धमनियां (Science Yearender)
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खुद तारा बन गए नील : चांद पर पहला कदम रखने वाले नील आर्मस्ट्रांग इस साल दुनिया को अलविदा कह गए। बयासी वर्ष की आयु में शनिवार को उनका निधन हो गया। कुछ ही दिनों पहले उनकी बाइपास सर्जरी हुई थी।

जुलाई 1969 को अपोलो-11 मिशन का नेतृत्व करते हुए नील आर्मस्ट्रांग ने चांद पर पहला कदम रखा था। इस दौरान उन्होंने कहा था, 'मनुष्य के लिए यह एक छोटा कदम, पूरी मानव जाति के लिए बड़ी छलांग साबित होगा।'

नील आर्मस्ट्रॉंग ने पहली बार हवाई जहाज़ 16 बरस की उम्र में उड़ाया। इस समय तक वो कार चलाना भी नहीं जानते थे। चांद से वापस आने पर जब नील आर्मस्ट्रॉंन्ग से पूछा गया कि चांद पर पहला कदम रखने के बाद उन्हें कैसा महसूस हुआ तो उन्होंने कहा कि बहुत बहुत छोटा
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मिलेंगी नई धमनियां : साल 2012 में मई का महीना हृदय रोगियों के लिए उम्मीद की एक किरण लेकर आया। इसराइल में वैज्ञानिकों की एक टीम ने एक मरीज की त्वचा की कोशिकाओं से स्वस्थ हृदय मांसपेशी कोशिकाएं बनाने में कामयाबी हासिल की।

वैज्ञानिकों ने जो कोशिकाएं तैयार कीं, वे बिल्कुल स्वस्थ हृदय मांसपेशी कोशिकाओं जैसी थीं। जब इन धड़कती कोशिशकाओं को एक चूहे में प्रत्यारोपित किया गया, तो उन्होंने आसपास मौजूद हृदय ऊतकों से जुड़ना शुरू कर दिया।

वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आगे चलकर इस स्टेम सेल थेरेपी को हृदय रोगियों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
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