बीबीसी समाचार
मुख पृष्ठ » सामयिक » बीबीसी हिंदी » बीबीसी समाचार » क्यों आता है बुढ़ापा?
BBC
एक नवजात बच्चे और सौ साल के बुजुर्ग के बीच का अंतर हम आसानी पहचान लेते हैं, लेकिन ये बताना कि बुढ़ापा क्यों और कैसे आता है बहुत मुश्किल काम है।

चेहरे पर झुर्रियां क्यों आती हैं, मांसपेशियां कमजोर क्यों पड़ने लगती हैं? इस तरह के सवालों के जवाब ढूंढने के लिए बार्सिलोना में वैज्ञानिकों ने 103 साल के एक व्यक्ति और एक नवजात बच्चे के डीएनए पर शोध किया है।

शोधकर्ताओं ने दोनों लोगों की 'एपीजेनेटिक्स' पर ध्यान दिया। एपिजेनेटिक्स जीन की उस स्ट्डी का नाम है, जो जीन के कार्य को शुरू या बंद करने पर ध्यान देता है।

जीन इंसानी शरीर का ब्लूप्रिंट होता है। इस ब्लूप्रिंट की कॉपी हर जीन में होती है, लेकिन हर जीन के इस्तेमाल की जरूरत नहीं पड़ती। बैलविटेग बायोमेडिकल के मैनेल एस्टेलर और उनकी टीम ने दिखाया है कि जीन की ब्लूप्रिंट पर नियंत्रन उम्र बढ़ने के साथ घट जाता है। किसी जीन को स्विच ऑफ यानी बंद करने के लिए मेथाइल ग्रुप के रसायन को डीएनए में खास जगह लगाया जाता है।

खोज: शोधकर्ताओं ने इस प्रयोग में पाया कि बच्चे के 80 प्रतिशत जीन में और बूढ़े व्यक्ति के 73 प्रतिशत जीन में इसका असर देखा गया। यानी दोनों के बीच का अंतर 5 लाख के लगभग रहा। डॉक्टर एस्टेल का कहना है कि इस खोज से ये पता चलता है कि कम उम्र में जीन पर ज्यादा नियंत्रण होता है, लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है ये कम होता जाता है और ज्यादा जीन स्विच ऑन होते हैं।

उन्होंने कहा कि एपिजेनेटिक्स उम्र के बढ़ने में बड़ा रोल अदा करता है, लेकिन क्या किसी व्यक्ति के एपिजीनोम को बदला जा सकता है जिससे ज्यदा लंबा और स्वस्थ जीवन जिया जा सके?

इस सवाल के जबाव में डॉक्टर एस्टेल कहते हैं कि ये ऐसी चीज है जिसे हम बाहर से प्रभावित कर सकते हैं। अगर हम एपिजीनोम को बहल पाएं तो हम बुढ़ापे की चाल को धीमा कर सकते हैं।
Feedback Print