इंदौर के प्राचीनतम प्रसिद्ध हनुमान मंदिर


 
प्रतिवर्ष ही रामभक्त हनुमान की जयंती देशभर में उल्लास के साथ मनाई जाती है। चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को यह पर्व बड़े ही उत्साह व धूमधाम के साथ मनाया जाता है। कहते हैं कि इस दिन हनुमानजी का जन्म हुआ था। पवनपुत्र हनुमान को सर्वशक्तिमान देवता के रूप में स्थान प्राप्त है। इस दिन विशेषकर हनुमानजी को प्रसन्न करने के विभिन्न उपाय भी किए जाते हैं। यहां प्रस्तुत हैं, इंदौर स्थित प्राचीनतम हनुमान मंदिरों की जानकारी - 
 
1. वीर बगीची : इंदौर के पंचकुइया क्षेत्र की वीर बगीची में स्थित हनुमान मंदिर करीब 400 साल पुराना बताया जाता है। इस मंदिर में स्थापित प्रतिमा खजूर के पेड़ से निकली थी जिसे बाद में ऊपर लाकर मंदिर में स्थापित किया गया। यह मंदिर अग्नि अखाड़े से संबंधित है। मंदिर की चौथी पीढ़ी के पुजारी मोहनलाल पारीख ने बताया कि मंदिर से जुड़े कई चमत्कार हैं। लेकिन एक बात तय है कि यहां आने पर व्यक्ति के मन को शांति मिलती है। हनुमान जयंती पर यहां विशेष आयोजन होते हैं। पूजा-अर्चना और महाआरती के साथ ही यहां आयोजित भंडारे में हजारों श्रद्धालु प्रसादी ग्रहण करते हैं। 
 
2. ओखलेश्वर हनुमानजी : मध्यप्रदेश के इंदौर जिले से 35 किलोमीटर दूर बाई ग्राम में नवग्रह शनि मंदिर से 18 किलोमीटर आगे स्थित ग्राम ओखला में ओखलेश्वर मठ में हनुमानजी की स्वयंभू प्रतिमा है। ब्रह्मलीन ओंकारप्रसादजी पुरोहित (पारीक बाबा) ने 1976 में यहां अक्षय तृतीया के दिन जो अखंड रामायण पाठ प्रारंभ किया था, वह अब भी जारी है और अनवरत जारी रहेगा।
यहां हनुमानजी की प्रतिमा की एक खासियत है कि वे शिवलिंग उठाए हुए हैं जबकि अमूमन वे पर्वतधारी के रूप में ही देखे जाते हैं। मठ पर हर माह रोहिणी नक्षत्र के दिन हनुमानजी को चोला चढ़ाया जाता है। रामनवमी, शिवरात्रि और हनुमान जयंती पर यहां मेले का विशेष आयोजन भी होता है।  
 
3. चमत्कारिक रणजीत हनुमान : रणजीत हनुमान मंदिर का अस्तित्व : बात है वर्ष 1907 की, तब गुमाश्ता नगर क्षेत्र में बसाहट नहीं हुई थी, वहीं पहलवानी का शौक रखने वाले अल्हड़सिंह भारद्वाज हनुमानजी के उपासक थे। उन्होंने तब इस वीरान जंगल क्षेत्र में पतरे की ओट लगाकर हनुमानजी की प्रतिमा स्थापित कर दी और छोटा-सा अखाड़ा बना दिया। इस तरह रणजीत हनुमान मंदिर अस्तित्व में आया। स्वर्गीय अल्हड़सिंह के पोते विजयसिंह भारद्वाज बताते हैं कि इस मंदिर से जुड़े अनगिनत किस्से हैं। रामनवमी और हनुमान जयंती पर यहां विशेष श्रृंगार, अनुष्ठान, पूजा-पाठ और आरती की जाती है। 
 

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