कावड़ यात्रा विशेष : अनुष्ठान मनभावन पावन यात्रा का...

कावड़ यात्रा एक भाविक अनुष्ठान है जिसमें कर्मकांड के जटिल नियम के स्थान पर भावना की प्रधानता है जिसके फलस्वरूप इस श्रद्धा-कर्म के कारण महादेवजी की कृपा शीघ्र मिलने की स्थिति बनती है। यह प्रवास-कर्म व्यक्ति को स्वयं से, देश से व देशवासियों से परिचित करवाता है। यात्राकर्ता के प्रति अन्य जन का क्या कर्म होना चाहिए?
गोस्वामी तुलसीदासजी की जनप्रिय, प्रभावकारी अमर कृति रामचरित मानस की प्रत्येक चौपाई मंत्र है आध्यात्मिकता व नीति का। इसके पारायण से ऊर्जा की प्राप्ति तथा इसके अनुसरण से लौकिक व पारलौकिक दशा सुधर जाती है। इसके लंकाकांड में एक चौपाई है। 
 
जो गंगाजलु आनि चढ़ाइहि। 
सो साजुज्य मुक्ति नर पाइहि॥ 
 
अर्थात जो भगवान शिव पर गंगा जल चढ़ाएगा, वह मेरे साथ एकाकार हो जाएगा। उसकी मुक्ति निश्चित रूप से मेरे में समावेश होकर होगी। यह वाक्य प्रभु श्री रामजी ने कहे हैं। शिवजी पर जल चढ़ाने की या पवित्र-प्राकृतिक स्रोत का नीर अर्पण करने की महिमा व महत्व को बताने वाले अनेक प्रमाण वेद-पुराण व धार्मिक ग्रंथों व महापुरुषों की वाणी में उपलब्ध हैं। भोले-भंडारी को अभिषेक अधिक प्रिय है। इस कर्मकांड से वे अतिशीघ्र प्रसन्न होकर कर्ता की कामना के लिए तथास्तु कहने में किसी तरह का विलंब या प्रश्न नहीं करते हैं। 

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