मंदिर की असली शोभा महावीर जयन्ती के अवसर पर मनाए जाने वाले उत्सव में होती है। इस अवसर पर यहाँ चैत्र शुक्ल त्रयोदशी से बैशाख कृष्ण द्वितीया तक पाँच दिवसीय लक्खी मेला भरता है। मेले में ध्वजारोहण, जयन्ती जुलूस, जलयात्रा, जिनेन्द्र रथयात्रा और कलशाभिषेक के कार्यक्रम होते हैं। इस पर्व का मुख्य आकर्षण रथयात्रा होता है। जब गंभीर नदी के किनारे गाजे-बाजे के साथ कैलाश अभिषेक को वैभवशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाता है।
यह स्वर्ण रथ बैलों द्वारा खींचा जाता है। महावीरजी की प्रतिमा पर चार व्यक्ति मिलकर चँवर झलते हैं। समस्त वातावरण भजनों और महावीर स्वामी के जय-घोष से गुंजायमान होता है। रथयात्रा के दौरान मीणा जाति के लोग मँजीरों की झंकार के साथ-साथ नाचते-झूमते नदी तट तक जाते हैं। इस तरह यह मेला सामुदायिक सद्भाव का भी प्रतीक है।
इस जुलूस के पश्चात प्रतिमा को धूमधाम के साथ मंदिर में पुनर्स्थापित किया जाता है। श्रद्धालु भारी तादाद में मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना के लिए एकत्रित होते हैं और आराधना की जाती है। संध्या को पूरे मंदिर को दीपों से सजाया जाता है।
मंदिर में वर्ष भर दिगंबर संतों का आवागमन लगा रहता है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु इन संतों के उपदेशों का लाभ लेते रहते हैं। संतों के लगातार प्रवास के कारण यह मंदिर जैन अनुयायियों के खास आकर्षण का केंद्र बन गया है।
इस मंदिर के आसपास तमाम दुकानें हैं, जहाँ अनाज, कपड़े और धर्म संबंधी सामग्रियाँ उपलब्ध हैं। पर्व के दौरान यात्रियों की सहूलियत को देखते हुए कई अस्थायी दुकानें भी लगाई जाती हैं। इस पर्व में राजस्थानी हस्तकला भी देखने को मिलती है।
कब जाएँ- इस मंदिर में यूँ तो दर्शन के लिए साल भर द्वार खुले रहते हैं, मगर इस मंदिर की असली शोभा मार्च-अप्रैल के महीने में आयोजित होने वाले पर्व में नजर आती है।
कैसे जाएँ- चाँदनगाँव दिल्ली-मुंबई ब्रॉंडगेज लाइन पर श्री महावीरजी रेलवे स्टेशन से करीब 6.5 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। यह हिंडौन से 18 किलोमीटर, जिला मुख्यालय करौली से 29 किलोमीटर और जयपुर से 176 किलोमीटर दूर है। मंदिर तक जाने के लिए बस और अन्य वाहन उपलब्ध हैं। मंदिर प्रबंध समिति की ओर से एक निःशुल्क बस दिन-रात मंदिर और रेलवे स्टेशन का चक्कर लगाती रहती है ताकि यात्रियों को किसी तरह की कोई असुविधा न हो।
कहाँ ठहरें:- मंदिर का प्रबंधन दिगम्बर जैन पंचों की एक कमेटी करती है। दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी राजस्थान सार्वजनिक प्रन्यास अधिनियम के अन्तर्गत रजिस्टर्ड प्रन्यास है। इस कमेटी ने मंदिर के आसपास तीन धर्मशालाओं का निर्माण करवाया है, जिसमें एसी कमरों से लेकर डॉरमेट्री तक सभी कुछ बहुत कम कीमत पर उपलब्ध है। साथ ही मंदिर प्रबंधन की तरफ से बेहद कम कीमत पर सात्विक नाश्ता और भोजन भी उपलब्ध करवाया जाता है।
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