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हिन्द की चादर गुरु तेगबहादुर
शहीदी पर्व पर विशेष
- सतमीत कौर

गुरु तेगबहादुर
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गुरु तेगबहादुर सिखों के नौवें गुरु हैं। औरंगजेब के साम्राज्य के समय की बात है। उसके दरबार में एक विद्वान पंडित आकर गीता के श्लोक पढ़ता और उसका अर्थ सुनाता था, पर वह पंडित गीता में से कुछ श्लोक छोड़ दिया करता था।

एक दिन पंडित बीमार हो गया और औरंगजेब को गीता सुनाने के लिए उसने अपने बेटे को भेज दिया किंतु उसे उन श्लोकों के बारे में बताना भूल गया जिनका अर्थ वहाँ नहीं करना था। उसके बेटे ने जाकर औरंगजेब को पूरी गीता का अर्थ सुना दिया जिससे औरंगजेब को यह स्पष्ट हो गया कि हर धर्म अपने आपमें एक महान धर्म है। पर औरंगजेब खुद के धर्म के अलावा किसी और धर्म की प्रशंसा नहीं सुन सकता था। उसके सलाहकारों ने उसे सलाह दी कि वह सबको इस्लाम धारण करवा दे।

औरंगजेब को यह बात समझ में आ गई और उसने सबको इस्लाम धर्म अपनाने का आदेश दिया और कुछ लोगों को यह कार्य सौंप दिया। उसने कहा कि सबसे कह दिया जाए कि इस्लाम धर्म कबूल करो या मौत को गले लगाओ। जब इस तरह की जबर्दस्ती शुरू हो गई तो अन्य धर्म के लोगों का जीना मुश्किल हो गया।

इस जुल्म के शिकार कश्मीर के पंडित गुरु तेगबहादुर के पास आए और उन्हें बताया कि किस तरह ‍इस्लाम धर्म स्वीकारने के लिए दबाव बनाया जा रहा है और न करने वालों को तरह-तरह की यातनाएँ दी जा रही हैं। हमारी बहू-बेटियों की इज्जत को खतरा है। जहाँ से हम पानी भरते हैं वहाँ हड्डियाँ फेंकी जाती है।

हमें बुरी तरह मारा जा रहा है। कृपया आप हमारे धर्म को बचाइए। जिस समय ये लोग समस्या सुना रहे थे उसी समय गुरु तेगबहादुर के 9 वर्षीय सुपुत्र बाला प्रीतम (गुरु गोविंदसिंह) वहाँ आए और पिताजी से पूछा- पिताजी ये लोग इतने उदास क्यों हैं? आप इतनी गंभीरता से क्या सोच रहे हैं?
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