अंतिम सिख गुरु गोविन्दसिंहजी ने सिखों को एकजुट करके एक नई शक्ति को जन्म दिया। उन्होंने खालसा पंथ की नींव रखी। सिख सैनिकों को सैनिक वेश में दीक्षित किया। प्रत्येक स्थिति में सदा तैयार रहने के लिए उन्होंने सिखों के लिए पाँच ककार अनिवार्य घोषित किए, जिन्हें आज भी प्रत्येक सिख धारण करना अपना गौरव समझता है-
१. केश - जिसे सभी गुरु और ऋषि-मुनि धारण करते आए थे।
२. कंघा - केशों को साफ करने के लिए।
३. कच्छा - स्फूर्ति के लिए।
४. कड़ा - नियमऔर संयम में रहने की चेतावनी देने के लिए।
५. कृपाण - आत्मरक्षा के लिए।
|