पूजा की विधि : इस देवस्थान की पूजा का नियम है कि गुरुवार को उपवास रख कोई भी भक्त मंदिर में चरण पादुका मंदिर, श्री काका महाराज की समाधि और औदुम्बर (गूलर) वृक्ष, जो परिसर में लगा है, की कम से कम 11 प्रदक्षिणा लगाने के पश्चात अपनी परेशानी या इच्छा श्रीदत्त महाराज से प्रार्थनापूर्वक कहे, लगातार तीन गुरुवार उपवास रख यह क्रम दोहराए तो उसकी मनोकामना पूर्ण होती है।
यह स्थान निःसंतान दंपतियों के दुःखों का निवारण करने वाला है। विधिवत पूजन की जानकारी कुलकर्णीजी से ली जा सकती है। यहाँ पूजनप्रातः सूर्योदय से सूर्यास्त के मध्य किया जाता है। मनोकामना पूर्ति के उपरांत यहाँ नारियल च़ढ़ाने का रिवाज है।
श्री काका महाराज के पश्चात उनके छोटे भाई गजानन गुरुनाथ कुलकर्णी, जिन्हें भक्त छोटे काका महाराज कहते हैं, टाटा एक्सपोर्ट की नौकरी छो़ड़ गुरु आज्ञा से अपने दोनों बेटों श्री श्रीपाद एवं श्री दत्तप्रसाद के साथ वर्तमान में मंदिर की व्यवस्था देखते हैं जो उनकी आठवीं पी़ढ़ी है। परिवार में ब़ड़े बेटे के ब्रह्मचारी रहने की परंपरा है। मंदिर का सारा खर्च कुलकर्णी परिवार द्वारा वहन किया जाता है।
यहाँ मनाए जाने वाले मुख्य उत्सव हैं- पादुका स्थापना दिवस, गुरु पूर्णिमा, शारदीय नवरात्र और श्री दत्त जन्मोत्सव। इस समय होने वाले भंडारे की व्यवस्था में किसी व्यक्ति या संस्था विशेष का योगदान नहीं, बल्कि श्रद्धालु भक्तजनों एवं गाँववासियों के सहयोग से होता है। मालवा का यह जागृत श्री दत्त पादुका मंदिर अपनी कीर्ति के लिए मशहूर है, जहाँ दूर-दूर से लोग अपनी परेशानियाँ व मनोकामनाएँ लेकर आते हैं।
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