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प्रवचन
07 सितंबर 2008 
माँ है तो सबकुछ है
जो तार दे, वही तीर्थ...!
अध्यात्म के लिए अहं त्यागें
मनुष्य को कर्मों का कर्ज चुकाना होगा
अपनी आदत क्यों छोड़ें हम?
मानवीय स्वभाव है प्रशंसा सुनना
स्वर्ण-युग नहीं है पीछे
यक्ष-प्रश्न की युगीन व्याख्या
सदा सत्य बोलो
साईबाबा के दोहे
क्षमा
दोष न देखो
किसी को न सताओ
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