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मानवीय स्वभाव है प्रशंसा सुनना
- अनिल जोशी
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मानव व्यवहार का एक बहुत महत्वपूर्ण नियम है। अगर हम उस नियम का पालन करेंगे तो हम कभी मुश्किल में नहीं फँसेंगे। वास्तव में अगर हम उस नियम पर चलेंगे तो हमारे पास अनगिनत दोस्त होंगे और हम हमेशा खुश रहेंगे। परंतु जिस पल हम उस नियम को तोड़ेंगे, उसी पल से हम बहुत सारी मुश्किलों में फँस जाएँगे।

यह नियम है, हमेशा दूसरे व्यक्ति को महत्वपूर्ण अनुभव कराओ! जॉन ड्यूई ने कहा है कि महत्वपूर्ण बनने की इच्छा मानव स्वभाव की सबसे महत्वपूर्ण इच्छा होती है। विलियम जेम्स ने कहा है कि 'हर मनुष्य की दिल की गहराई में यह लालसा छुपी होती है कि उसे सराहा जाए।' यही लालसा मानव सभ्यता के विकास का कारण है।

दार्शनिक सदियों से मानव संबंधों के नियमों पर चिंतन-मनन करते आ रहे हैं और इस चिंतन-मनन से केवल एक सूत्र विकसित हुआ है। यह सूत्र नया नहीं है। यह उतना ही पुराना है, जितना इतिहास। दार्शनिक भी सदियों से अपने अनुयायियों को इसकी शिक्षा देते आए हैं।
  मानव व्यवहार का बहुत महत्वपूर्ण नियम है। अगर हम उस नियम का पालन करेंगे तो कभी मुश्किल में नहीं फँसेंगे। उस नियम पर चलेंगे तो हमारे पास अनगिनत दोस्त होंगे और हम हमेशा खुश रहेंगे। परंतु जिस पल हम उस नियम को तोड़ेंगे, उसी पल से मुश्किलों में फँस जाएँगे      


बुद्ध ने ईसा के पाँच सौ साल पहले पवित्र गंगा नदी के किनारे पर इसका पाठ पढ़ाया था! 1900 साल पहले हिन्दू धार्मिक ग्रंथों ने इस सूत्र की व्याख्या की थी। ईसा मसीह ने इस सूत्र को एक विचार के रूप में संक्षेप में कहा था, जो शायद दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण नियम है, 'दूसरों के साथ वही व्यवहार करो, जैसा तुम चाहते हो कि वे तुम्हारे साथ करें।'

आप चाहते हैं कि आपसे मिलने-जुलने वाले लोग आपकी तारीफ करें, आप चाहते हैं कि आपकी प्रतिभा को पहचाना जाए, आप चाहते हैं कि आप अपनी छोटी-सी दुनिया में महत्वपूर्ण बनें, आप सस्ती चापलूसी या झूठी तारीफ नहीं सुनना चाहते, परंतु आप सच्ची प्रशंसा अवश्य सुनना चाहते हैं।

आप चाहते हैं कि आपके मित्र और सहयोगी आपकी दिल खोलकर तारीफ करें और मुक्तकंठ से सराहना करें! हम सभी यह चाहते हैं। इसलिए हमें इस स्वर्णिम नियम का पालन करना चाहिए और दूसरों को वही देना चाहिए, जो हम उनसे अपने लिए चाहते हैं।

कब? कैसे? कहाँ? जवाब है- हर समय, हर कहीं। कई लोगों की जिंदगी शायद बदल जाए अगर कोई उन्हें यह अनुभव करा दे कि वे महत्वपूर्ण हैं। बिना लाग-लपेट के सच बात यह है कि आपसे मिलने वाले ज्यादातर लोग अपने आपको आपसे किसी न किसी मामले में सुपीरियर समझते हैं।

उनका दिल जीतने का अचूक तरीका किसी कुशल तरीके किसी कुशल तरीके उन्हें यह जतला देना है कि आपको उनके महत्व का एहसास है और आप इसे सचमुच स्वीकार करते हैं।
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