सैयदना ने अपने पिता की स्मृति में हिज होलीनेस डॉ. सैयदना ताहेर सैफुद्दीन मेमोरियल फाउंडेशन नाम से एक जनसेवा ट्रस्ट की स्थापना की। इस ट्रस्ट से हजारों मुस्लिम तथा गैर मुस्लिमों ने लाभ उठाया है।
1970 सैयदना ने मुंबई में पहले महाविद्यालय बुरहानी कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड आर्ट्स की स्थापना की। इस समय दुनियाभर में सैयदना के प्रशासन में चार सौ से ज्यादा शैक्षणिक संस्थान संचालित किए जाते रहे हैं।
1975 सैयदना ने अपने मरहूम वालिद के प्रति बेइंतहा सम्मान और मुहब्बत का इजहार करते हुए सैयदना ताहेर सैफुद्दीन का मकबरा-राउदात ताहेरा का निर्माण करवाया, जिसका अनावरण भारत के पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय फखरुद्दीन अली अहमद ने किया था। इस अनूठे और नायाब शिल्प में अंदर की दीवारों पर सोने के हरफों में पूरी कुरान-ए-मजीद लिखी गई है।
1976 सैयदना ने लंदन की यात्रा कर वहाँ के प्रसिद्ध एलबर्ट हॉल में वर्ल्ड ऑफ इस्लाम फेस्टिवल में दर्जनों यादगार व्याख्यान दिए।
1978 इजिप्ट के राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक ने विदेशियों को दिया जाने वाला दुर्लभ खिताब 'विशा हुन नील' से नवाजा।
1979 यह साल 1399 हिजरी के रूप में मनाया गया। यह हिजरी सदी का अंतिम बरस था। नई हिजरी सदी के साथ ही इस्लाम की मान्यताओं तथा शिक्षाओं का नया उजाला लेकर आया। तदनुसार सैयदना ने दावत और इसके इतिहास की ऐतिहासिक घटना के रूप में अल मुलतका अल फातेमी अल इलामी की शुरुआत कर बोहरा समाज को जागरूक बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
1980-1981 ए.डी.में इमाम अल हाकीम (एएस) ने दुनिया की चौथी सबसे बड़ी मस्जिद अल-जामे अल-अनवर का निर्माण किया था। इस जीर्ण-शीर्ण मस्जिद का जीर्णोद्धार करवाकर सैयदना साहब ने इसका पुराना वैभव लौटाया। इस नव श्रृंगारित मस्जिद का उद्घाटन इजिप्ट के राष्ट्रपति अनवर सादात द्वारा किया गया।
सैयदना ने इस्लामी आर्थिक सिद्धांतों को लागू करने के उद्देश्य से कर्जेन हासना (ब्याजरहित ऋण) संस्थान की स्थापना की। यह संस्थान कर्जेन हासना की कुरान की अवधारणा को आगे बढ़ाने में केन्द्रीय भूमिका निभाता है।
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