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डॉ. सैयदना साहब के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएँ
- आमिल साहेब इन्दौ

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दाई उल मुतलक परंपरा के 52वें गद्दीनशीं हिज होलीनेस डॉ. सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन एक श्रेष्ठतम शिक्षाविद, उदारमना, मानवतावादी, अथक यायावर और भलाई के अग्रदूत हैं। वे दुनियाभर में फैले दाऊदी बोहरा समाज के लाखों लोगों के प्रमुख हैं।

1915
डॉ. सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन का जन्म भारत के सूरत शहर में 6 मार्च 1915 को हुआ। उनके वालिद साहब हिज होलीनेस डॉ. सैयदना ताहेर सैफुद्दीन ने यह फरमाया था कि उनका बेटा फातेमी दावत (इमाम का वह मिशन जो अल-दई-अल मुतलक द्वारा चलाया जाता है) के सम्मान तथा प्रतिष्ठा का अग्रदूत होगा।

1927
तेरह वर्ष की अल्प आयु में अपने वालिद की देखरेख में ली गई तालीम के परिणामस्वरूप सैयदना ने पूरी की पूरी कुरान-ए-मजीद को याद कर लिया था।

1933
उन्नीस बरस की आयु में 51वें दई-अल-मुतलक सैयदना ताहेर सैफुद्दीन ने सैयदना को अल-दई-अल-मुतलक का वारिस मुकर्रर कर दिया था।
  दाई उल मुतलक परंपरा के 52वें गद्दीनशीं हिज होलीनेस डॉ. सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन एक श्रेष्ठतम शिक्षाविद, उदारमना, मानवतावादी, अथक यायावर और भलाई के अग्रदूत हैं। वे दुनियाभर में फैले दाऊदी बोहरा समाज के लाखों लोगों के प्रमुख हैं।      


1941 और 1942
1941 में सैयदना को अल-अलीम-उर-रासिक का खिताब अता किया गया तथा एक बरस बाद सैयदना ताहेर सैफुद्दीन ने उन्हें उमादातुल उलमा एल मुवाहेदीन का खिताब अता किया। यह दुर्लभ सम्मान है, जो समुदाय के सबसे ज्यादा विद्वान इंसान को ही दिया जाता है।

1961
सैयदना ने हजारों बोहराओं की नगरी तथा चार सदियों से दावत की गद्दी यमन की यात्रा की, जिसके परिणामस्वरूप यमन सरकार और वहाँ के लोगों ने बोहराओं को मान्यता प्रदान कर दी। इस महान उपलब्धि पर सैयदना ताहेर सैफुद्दीन ने अपने बेटे को 'मंसूर-उल-यमन' नामक ऐतिहासिक खिताब से नवाजा। यह खिताब इससे पहले एक मर्तबा बारह सदी पहले दिया गया था।

1965
सैयदना ताहेर सैफुद्दीन के इंतकाल होने पर सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन अल-दाइल-अल मुतलक की गद्दी पर 52वें गद्दीनशीन जलवा अफरोज हुए। अपने पूर्वजों और वालिद की परंपरा को अपनाते हुए सैयदना ने पहला रिसाला रमदानिया इस्तिफताहो जोबादिल मारिफ, जो कि अरब साहित्य की रचना है, लिखा।

1966
दुनिया की सबसे पुरानी यूनिवर्सिटी और सर्वाधिक प्रतिष्ठित शिक्षण केन्द्र अल-अजहर यूनिवर्सिटी ऑफ कैरो, इजिप्ट ने सैयदना को डॉक्टर ऑफ इस्लामिक स्टडीज (सम्मानजनक कार्य के लिए) की उपाधि प्रदान की। सैयदना को उनके व्यापक तथा उदारवादी मानवीय कार्यों के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने 'डॉक्टर ऑफ थियोलॉजी' की मानद उपाधि प्रदान की।
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