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ज्ञान मनुष्य की सर्वोत्तम उपलब्धि
WDWD
ढाई हजार से अधिक वर्ष पूर्व फारस (आज का ईरान) में पैगंबर जरथुस्त्र ने सत्य व सदाचार का संदेश दिया था। उनके द्वारा प्रतिपादित धर्म जरथोस्ती धर्म कहलाया तथा सातवीं-आठवीं सदी में इसके अनुयायी जब भारत आए तो पारसी कहलाए।

पैगंबर जरथुस्त्र के उपदेशों ने जीवन के तमाम पहलुओं को स्पर्श किया तथा ये आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। ज्ञान प्राप्ति को उन्होंने प्रत्येक मनुष्य के लिए अनिवार्य और परम आवश्यक माना। वे कहते हैं, 'ज्ञान मनुष्य की सर्वोत्तम उपलब्धि है। यह अनमोल है। यह कभी धोखा न देने वाला आजीवन मित्र है, मार्गदर्शक है।'

वे ईश्वर से प्रार्थना करते हैं, 'मुझे जानने और सीखने की शक्ति दो। मैं जीवन भर ज्ञान प्राप्त करता रहूँ। मुझे हर जगह से, हर समय सूचना और शिक्षा पाने दो।'

प्रकृति के बारे में जरथुस्त्र कहते हैं, 'समूची प्रकृति ईश्वर के अस्तित्व का प्रमाण है। सूर्य, चंद्रमा, सितारों, पृथ्वी, पेड़-पौधों, वायु, जल, पशु-पक्षियों सबमें ईश्वर प्रतिबिंबित होता है। अतः पृथ्वी, वायु, जल को प्रदूषित मत करो। पेड़ों को काटो नहीं बल्कि बंजर भूमि पर बाग खिलाओ। पशु-पक्षियों को मारो नहीं, उन्हें प्रेम करो।'

समय के महत्व को प्रतिपादित करते हुए वे कहते हैं, 'समय बेशकीमती है। समय जीवन है। इसे न खरीदा जा सकता है, न उधार लिया जा सकता है। समय की बर्बादी जीवन की बर्बादी है। बीता हुआ कल सुधारा नहीं जा सकता। आने वाला कल शायद कभी न आए।

आज ही हमारा है, इसका हम श्रेष्ठतम उपयोग करें। जो अतीत से नहीं सीखता, वह भविष्य द्वारा दंडित किया जाता है।'
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