भारत भूमि पर जन्मा बौद्ध दर्शन इसकी सीमाओं को लाँघकर दुनिया के कई देशों में फैला। आज भी इस दर्शन की मानवतावादी, बुद्धिवादी और उदारतापूर्ण परिकल्पनाएँ प्रासंगिक हैं। इस दर्शन को कलाओं में पिरोकर अनूठी प्रस्तुतियाँ तैयार की गई हैं। देश और विदेश के नृत्य दलों की ये प्रस्तुतियाँ साँची में आयोजित तीन दिनी बौद्ध महोत्सव में नुमायाँ होंगी।
बौद्ध अनुयायी और दुनिया भर के पर्यटकों के आकर्षण केंद्र साँची में 29 नवंबर से 'बौद्ध महोत्सव'का आयोजन किया जा रहा है। 29 नवंबर से 1 दिसंबर तक आयोजित इस महोत्सव में भारत के अलावा अन्य देशों के बौद्ध प्रदर्शनकारी कलारूपों को भी आमंत्रित किया गया है। संस्कृति विभाग के इस आयोजन में देश-विदेश के कला दल नृत्य और नृत्य नाटिका के जरिए बौद्ध दर्शन के विभिन्न पहलू पेश करेंगे।
संस्कृति संचालक श्रीराम तिवारी ने बताया कि अनुसूचित जाति कल्याण विभाग और मध्यप्रदेश पर्यटन के सहयोग से बौद्ध विचार पर केन्द्रित उत्सव 'सम्बोधि'का आयोजन किया जा रहा है। अरूणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, त्रिपुरा, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के नृत्य पेश किए जाएँगे। साथ ही श्रीलंका, तिब्बत, थाईलैण्ड, भूटान और जापान के नृत्य एवं संगीत की प्रस्तुतियाँ भी होंगी। इसके अलावा कथक नृत्य नाटिका 'बुद्ध' भी पेश किया जाएगा।
बौद्ध परम्परा के विविध प्रकारों के यंत्रों, मण्डलों और मुखौटों का सृजन अन्यन्त कलात्मकता से किया है। थंका चित्र, चक्र, यंत्र, मंडल, मुखौटे और मध्यप्रदेश में प्राप्त बौद्घ प्रतिमाओं-अवशेषों की प्रदर्शनी भी लगाई जा रही है। इसके अलावा ध्वनि, प्रकाश और लेजर शो का आयोजन भी किया जा रहा है। सभी प्रस्तुतियाँ विश्व धरोहर स्थल साँची परिसर में रोजाना शाम सात बजे से प्रारंभ होंगी। प्रवेश निःशुल्क है।