- नरेंद्र शर्मा पंचगंगा काशी पीठाधीश्वर रामानंदाचार्य स्वामी रामनरेशाचार्यजी की प्रेरणा व मार्गदर्शन में हरिद्वार में दुनिया का सबसे ऊँचा श्रीराम मंदिर आकार ले रहा है। इसकी लागत लगभग सौ करोड़ होगी और यह 2013 में बनकर तैयार हो जाएगा। मंदिर निर्माण की शेष योजनाओं को मूर्त रूप देने के लिए इंदौर के नवरतन बाग में विराजित स्वामीजी ने कहा कि कुंभक्षेत्र में यदि नासिक को छोड़ दिया जाए तो कहीं भी राम मंदिर नहीं है। हरिद्वार में यह सप्तसरोवर क्षेत्र में ऋषिकेश चुंगी से गंगा की ओर जाने वाले सप्तऋषि मार्ग पर बन रहा है। मंदिर स्थल पर खुदाई का कार्य पूर्ण हो चुका है और अब तराशे हुए पत्थरों को लगाने का काम जोरशोर से जारी है। स्वामीजी ने बताया कि प्रस्तावित मंदिर सनातन धर्म की मंदिर निर्माण की समस्त मान्यताओं से परिपूर्ण होगा। इसमें जोधपुर के तराशे हुए पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है। स्वामीजी ने बताया कि जब उन्होंने अहमदाबाद, दिल्ली व लंदन में 800 करोड़ की लागत से विशाल अक्षरधाम मंदिर बनाने वाले महात्मा प्रमुख स्वामीजी को राम मंदिर की परिकल्पना के बारे में बताया तो वे भी आश्चर्यचकित रह गए। हालाँकि अक्षरधाम मंदिर को अब पर्यटन स्थल के रूप में देखा जाने लगा है, पर प्रस्तावित राम मंदिर प्रमुख आध्यात्मिक स्थल होगा। इसमें प्रवेश करते ही भक्तों में रामभाव स्वमेव जाग उठेगा। मंदिर के लिए इंदौर से भी धनराशि प्राप्त हुई है और हो रही है। डेढ़ करोड़ रु. मूल्य के करीब एक लाख वर्गफुट क्षेत्र में मंदिर की लंबाई 193 फुट, चौड़ाई 102 फुट और ऊँचाई करीब 175 फुट होगी। इसमें 5 मुख्य शिखर, 85 इंडको (मुख्य शिखर के साथ छोटे शिखर की आकृति), 24 तिल्लको तथा 104 सुसज्जित स्तंभ भी होंगे। मंदिर के सबसे पीछे भव्य तालाब भी होगा। अन्य विशेषताओं में मंदिर में भगवान के वन विहार के लिए एक रमणीय उद्यान, दोनों दिशाओं में पूर्ण सुसज्जित शिखर के साथ भंडार मंदिर, शयन मंदिर, स्नान मंदिर, संग्रह मंदिर और देश-विदेश से आने वाले भक्त समुदाय के लिए विशाल प्रतीक्षालय भी होगा। |