अक्षय तृतीया का दिन शुभ कर्म, विवाह आदि समस्त संस्कारों और दान-पुण्य के लिए श्रेष्ठ है। इस दिन सभी साधनाएँ अक्षय पुण्य देती हैं। ज्योतिष के अनुसार अक्षय तृतीया को यदि सोमवार व रोहिणी नक्षत्र भी हो तो इसका बड़ा महत्व होता है। इस वर्ष यह त्रिवेणी योग बन रहा है। 27 अप्रैल, वैशाख शुक्ल अक्षय तृतीया को सोमवार तो है ही, साथ ही आठ घड़ी सत्रह पल के बाद कृतिका नक्षत्र समाप्त होकर रोहिणी लग जाएगा, जो शुभ योग है। प्राचीनकाल से ही किसानों में यह धारणा रही है कि अक्षय तृतीया के दिन चन्द्रमा के अस्त होते समय रोहिणी नक्षत्र का आगे आना शुभ एवं पीछे रहना अच्छा नहीं माना जाता है। इस वर्ष भी यह किसानों के लिए शुभ योग लाई है। सोमवार को परशुराम जयंती भी है। |