गुवाहाटी के कामाख्या मंदिर में मंगलवार से शुरू तीन दिवसीय अम्बूवाशी मेले में भाग लेने के लिए देशभर के हजारों श्रद्धालु पहुँच गए हैं। समुद्र तल से तीन सौ किमी ऊपर नीलांचल पहाडि़यों पर स्थित मंदिर में इस मेले की शुरुआत बड़े धूमधाम के साथ हुई।
भगवान शिव की पत्नी मानी जाने वाली कामाख्या देवी के इस मंदिर तक पहुँचने के लिए लोग पहा़ड़ पर च़ढ़ाई करते हैं। लोगों का कहना है कि इस सालाना उत्सव में विदेशी भी ब़ड़ी संख्या में भाग लेते हैं।
तीन दिन का मेला धरती माता के 'मासिक धर्म' काल का उत्सव है। इस दौरान कामाख्या मंदिर के दरवाजे बंद होते हैं और चौथे दिन देवी की मूर्ति को नहलाने के बाद आम लोग दर्शन करते हैं। तीन दिनी उत्सव के दौरान पुजारी और विधवाएँ उपवास रखती हैं, चौथे दिन देवी की पूजा के बाद ही ये लोग अन्न ग्रहण करते हैं। तीन दिन के उपवास के दौरान दोनों संप्रदाय के लोग एक-दूसरे बात नहीं करते हैं।
इस दौरान यह माना जाता है कि जो भी देवी से माँगा जाता है, उसकी तुरंत प्राप्ति होती है। तांत्रिक साधना के लिए भी इसे अनुकूल माना जाता है। वैष्णव और शैव दोनों ही संप्रदाय के लोग इसे मनाते हैं। (-प्रे)
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