क्रांतिदृष्टा संतश्री कबीरदासजी के प्रगटोत्सव पर कल अनेक कार्यक्रम हुए। कहीं शोभायात्रा निकली, तो कहीं संगोष्ठी रखी गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने कबीरदासजी को संतों का संत बताया और कहा कि पाखंडियों व धर्म के धंधेबाजों की उन्होंने खूब खबर ली। उनकी वाणी आज भी प्रासंगिक है।
इसके अंतर्गत भव्य शोभायात्रा निकली गई, जिसमें आकर्षक झाँकियाँ, ऊँट, हाथी, घोड़े, बग्घी, बैंडबाजे, अखाड़े, भजन मंडलियाँ और सुज्जित वाहन भी शामिल हुए।
इस मौके पर छुआछूत, अंधविश्वास, पाखंड व रूढ़ियों के खिलाफ कबीर की वाणियों का गायन कर जनजागरूकता पर चर्चा की गई। इस मौके पर कबीरदासजी की मानव मूल्यों संबंधी साखियों का वाचन कर उनका भावार्थ प्रस्तुत किया गया।
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