नवदीक्षित आर्यिका पूर्णमति माताजी (85) का शनिवार रात लगभग 9 बजे नवकार महामंत्र का श्रवण करते हुए सल्लेखनापूर्वक समाधिमरण हो गया।
माताजी इंदौर के कालानीनगर स्थित गुप्ति सदन पर पिछले तीन दिनों से उपाध्यायश्री गुप्तिसागरजी महाराज के सान्निध्य व निर्देशन में अपने मरण को मांगलिक बनाने के लिए साधनारत थीं। इससे उनके शरीर का वजन भी बड़ी तेजी से कम हो गया था।
माताजी का डोल रविवार को गुप्ति सदन से निकलकर बड़ा गणपति स्थित छोटी नसिया गया, जहाँ उनकी अंत्येष्टि की गई। उनकी समस्त क्रियाएँ उपाध्यायश्री गुप्तिसागरजी, ब्र. रंजना दीदी व सुमन शास्त्री के सान्निध्य में हुई। दीक्षा के पूर्व वे गृहस्थ अवस्था में पिछले 10 वर्षों से छत्रपतिनगर में अपनी पुत्री के साथ ही रह रही थीं।
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