- कमल इसरानी
चेटीचंड उत्सव के तहत साधु वासवानी उद्यान में आज, गुरुवार को राजस्थान के कलाकार मांगणिहार का मंचन करेंगे। आयोजन समिति के संयोजक हरीश फतेहचंदानी ने बताया कि मांगणिहार को राजस्थानी लोक गायन शैली माना जाता है, जबकि मूलतः यह सिन्धी है। विस्थापन के चलते सिन्धी समाज इसे भूल गया था।
अपनी संस्कृति से पुनः इसे जोड़ते हुए गुरुवार की रात्रि 8.30 बजे लोक गायन नृत्य द्वारा भारत सिन्धी प्रेम गाथाओं को प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री ईश्वरदास रोहाणी होंगे।
चेटीचंड उत्सव पर आयोजित सात दिवसीय सिन्धी मेले के तीसरे दिन पालनपुर के परमानंद प्यासी ने अपनी प्रस्तुति दी। प्यासी जिन्दगी के विभिन्न पहलुओं को कथा, कथानक, गीत-संवाद के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं। | | 'तुहिंजे गंज में अहि कमी कान काई' (हे ईश्वर, आपके आशीर्वाद में कोई कमी नहीं है), 'उथी कर तूं करम रोटी रब दीन्दो' (उठ इंसान कर्म कर, रोटी रब देंगे), 'अमरलाल प्यारा...।' |
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आम जीवन में घटने वाली घटना-दुर्घटना को हास्य में पिरोकर प्रस्तुत करने में उनका कोई जवाब नहीं। प्यासी ने पुत्री जन्म पर खुश होने की सीख भी समाज को दी। 'तुहिंजे गंज में अहि कमी कान काई' (हे ईश्वर, आपके आशीर्वाद में कोई कमी नहीं है), 'उथी कर तूं करम रोटी रब दीन्दो' (उठ इंसान कर्म कर, रोटी रब देंगे), 'अमरलाल प्यारा...' और 'जियो सिन्धी' जैसे गीत अपने संवादों के बीच में प्यासी ने सुनाए।
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