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चलो मनाएँ क्षमा पर्व...
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भगवान ने सिर्फ मानव को ही बोलने की शक्ति प्रदान की है। और आज हर इंसान अहं के वशीभूत होकर जी रहा है। उसकी आँखों पर पड़ी अहंकार की यह पट्टी इंसान के देखने-समझ ने की शक्ति खो देती है। उसके मन में निरंतर उठने वाले विचारों से आदमी आसानी से मुक्त नहीं हो पाता और इसीलिए मनुष्य चाहकर भी अहं के लोभ से मुक्त नहीं हो पाता।

दस दिनों में किया गया धर्म आपके जीवन में संतुष्टि का भाव लाता है। पर्युषण पर्व के दौरान किया गया आत्मशुद्धि का यह तप मनुष्य के जीवन को उज्ज्वल कर देता है। धर्म की ऊँगली पकड़कर चलने वाला मनुष्य हमेशा मोक्ष को प्राप्त होता है।
जीवन में कई बार आपके सामने ऐसे मौके भी आते है जिस समय झूठ बोले बिना काम नहीं चल सकता तो वहाँ झूठ भी बोलना पड़ता है लेकिन अगर मनुष्य अपनी गलतियों को स्वीकारने की हिम्मत रखता है तो शायद उसके पापों की संख्या कुछ कम हो सकती है।


जीवन में कई बार आपके सामने ऐसे मौके भी आते है जिस समय झूठ बोले बिना काम नहीं चल सकता तो वहाँ झूठ भी बोलना पड़ता है लेकिन अगर मनुष्य अपनी गलतियों को स्वीकारने की हिम्मत रखता है तो शायद उसके पापों की संख्या कुछ कम हो सकती है।

यह वही समय है जब आप अपने अहं को छोड़कर-त्यागकर, अपने चंचल मन को वश में करके अपने से बड़े हो या छोटे, सभी से बिना झिझक क्षमा माँगें और क्षमा करने का भाव भी अपने मन में रखें।

आपकी आत्मा तभी शुद्ध रह सकती है जब आप स्वयं भी गलती करने से बचें। और दूसरे को क्षमा कर समस्त जीवों को अभयदान दें। तभी हमारा क्षमावाणी पर्व मनाना सार्थक होगा।
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