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मंगल दीवो
दीवो रे दीवो प्रभु मंगलिक दीवो,
आरती उतारीने बहु चिरंजीवो, दीवो... ॥1॥

सोहमणुं घेर पर्व दीवाळी,
अम्बर खेले अमराबाली, दीवो...॥2॥

दीपाळ भणे एणे कुळ अजुवाळी,
भावे भगते विघन निवारी, दीवो... ॥3॥

दीपाळ भणे एणे ए कलिकाळे,
आरती उतारी राजा कुमारपाळे, दीवो... ॥4॥

अम घेर मंगलिक, तुम घेर मंगलिक,
मंगलिक चतुर्विध संघ ने होजो, दीवो... ॥5॥
और भी
आरती
श्री बृहत्‌-शांति (बड़ी)
स्नात्र पूजा : ढाल-विवाहलानी
जैन आचार्यों के उपदेश
।। प्रमुख जैन तीर्थ क्षेत्र ।।
।। प्रमुख जैन पर्व ।।