मुख्य पृष्ठ > धर्म-संसार > धर्म-दर्शन > जैन धर्म
सुझाव/प्रतिक्रिया मित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
लक्ष्मी, संपत्ति व सुख प्राप्त करने हेतु
हेतु- लक्ष्मी, संपत्ति व सुख प्राप्त होते हैं।

स्तोत्रस्रजं तव जिनेन्द्र! गुणैर्निबद्धां भक्त्या मया रुचिर-वर्ण-विचित्र-पुष्पाम्‌।
धत्ते जनो य इह कंठ-गतामजस्रं तं मानतुंगमवशा समुपैति लक्ष्मीः ॥ (48)

केवल परमात्मा-भक्ति में डूबकर मैंने स्तोत्ररूपी इस माला का गूँफन तरह-तरह के शब्द-सुमनों से किया है... जो भी व्यक्ति इस माला को अपने कंठ में धारण करेगा (प्रतिदिन सस्वर इस स्तोत्र का गान करेगा) वह अवश्यमेव मानतुंगमयी मोक्ष-श्री को प्राप्त करेगा।

ऋद्धि- ॐ ह्रीं अर्हं णमो सव्वसाहूणं ।

मंत्र- ॐ नमो भगवते महति महावीर वड्ढमाण बुद्धिरिसीणं ॐ ह्राँ ह्रीं ह्रूँ ह्रौं ह्रः असिआउसा झ्रौं झ्रौं स्वाहा ।
और भी
सभी दिशाओं में विजय प्राप्त करने हेतु
बंधनों से मुक्ति हेतु
रोग-व्याधि सभी दूर करने हेतु
समुद्र का भय दूर करने हेतु
विजय प्राप्त करने हेतु
सभी तरह के भय टालने, शत्रु को वश में करने हेतु