मुख्य पृष्ठ > धर्म-संसार > धर्म-दर्शन > जैन धर्म
सुझाव/प्रतिक्रिया मित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
अग्नि का भय दूर करने हेतु
हेतु- अग्नि का भय दूर होता है।

निर्धूम-वर्तिरपवर्जित-तैल-पूरः कृत्स्नं जगत्त्रयमिदं प्रकटीकरोषि ।
गम्यो न जातु मरुतां चलिताचलानां दीपोऽपरस्तवमसि नाथ! जगत्प्रकाशः ॥ (16)

तीन लोक को दीप्ति से पूरित करने वाले आप कितने अजीब दीपक से हो! नहीं तो इस दीपक में तेल है... न ही बाती! न ही इसमें धुएँ की रेखा उठती है..! पहाड़ों को प्रकंपित करने वाली हवा भी आपकी जगत्प्रकाशी ज्योत को तनिक भी कंपित नहीं कर पाती यानी हिला नहीं सकती।

ऋद्धि- ॐ ह्रीं अर्हं णमो चउदसपुव्वीणं ।

मंत्र- ॐ नमो सुमंगला-सुसीमा-नामदेवी सर्वसमीहितार्थं वज्रश्रृंखलां कुरु कुरु स्वाहा ।
और भी
शक्ति एवं सौभाग्य बढ़ाने हेतु
बुद्धि, स्मरणशक्ति तीव्र बनाने हेतु
चोर का भय दूर करने हेतु
आकर्षण, वशीकरण में उपयोगी हेतु
गुम हुई चीज या व्यक्ति वापस पाने हेतु
वाद-विवाद में विजय, शत्रु का पराभव हेतु