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स्नात्र पूजा की विधि
Mahavir
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प्राथमिक तैयारी

* प्रथम तीन गढके बदले तीन सुंदर पाट रखकर उस पर सिंहासन रखें।
* नीचे के पाट पर बीच में केसर का स्वस्तिक निकालें और उस पर चावल रखकर श्रीफल रखें।
* सिंहासन के बीच में केसर का स्वस्तिक निकालें और उस पर रुपये का सिक्का रखकर, तीन नवकार गिनकर उस पर धातु की प्रतिमाजी बिठाएँ।
* प्रतिमाजी के दाहिनी ओर, प्रतिमाजी की नाक की ऊँचाई तक घी का दीप रखें।
* बाद में स्नात्र पूजा करने वाले नाडाछडी बाँधकर हाथ में पंचामृत भरा हुआ कलश लेकर तीन नवकार गिन, प्रभुजी और सिद्धचक्रजी को * पक्षाल करें। (पंचामृत दूध, दही, शकर, घी और पानी का मिश्रण)
* फिर बालाकुंची करके पानी का पक्षाल कर तीन कपड़ों से अंग पोंछकर केसर से पूजा करें।
* बाद में हाथ धोकर खुद के दाहिने हाथ की हथेली में केसर का स्वस्तिक करें।
* बाद में स्नात्र करने वाले कुसुमांजलि का थाल लेकर खड़े रहें। (कुसुमांजलि- केसर, चावल और पुष्प का मिश्रण)
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और भी
॥ गाथा-आर्या गीति ॥
स्नात्र पूजा
ढाल
ढाल : जिन जनम्याजी
संयम और तप
अवसर पर्युषण पर्व का