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हर कौम पुकारेगी हमारे हैं हुसैन
- बुरहानुद्दीन शकरुवाला
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नवासाए रसूल (स.स.) जिगर गौशए बतुल हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) ने आज से लगभग 1400 साल पूर्व कर्बला के तपते सेहरा में अपनी व 72 जानिसार साथियों की शहादत का नजराना पेश कर इस्लाम की सलामती और दीन की सर बुलंदी के लिए अपना सब कुछ कुर्बान करने का बेमिसाल पैगाम देकर यह साबित कर दिया है कि 'इस्लाम पर हर शै को कुर्बान किया जा सकता है।

लेकिन इस्लाम को किसी शै पर कुर्बान नहीं किया जा सकता' निजामे इस्लामी की बहाली के मकसदे अजीम के लिए इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत इस्लामी निजाम की रूह को कायम व जिंदाकर गई है व इस्लाम को अजमत व सर बुलंदी अता कर गई। तपता रेगिस्तान व तीन दिन की भूख व प्यास में राहे खुदा में दी गई शहादत इस्लाम को ताजगी व जिंदगी अता कर गई।

इमाम हुसैन (अ.स.) ने न सिर्फ जुल्म के आईने को तोड़ दिया बल्कि जुल्म और जालिम के खिलाफ लोगों के दिलों और जेहनों में शऊर भी पैदा कर दिया। इमाम हुसैन की मासूम व पाकीजा शख्सियत एक ऐसा मकतब है जो कुर्बानी, सब्र और जानिसारी का सबक सिखाता है।

इंसानियत की भलाई और बहादुरी की तालिम देता है। हर बरस मोहर्रम आपकी अजीम फतेह का ऐलान करता है। अक्ल और शऊर के मुताबिक हकीकत में पैगामे हुसैन और मकसदे हुसैन पर चलने की राहें दुनिया आज भी तलाश कर रही हैं और करती रहेंगी।
  इमाम हुसैन (अ.स.) ने न सिर्फ जुल्म के आईने को तोड़ दिया बल्कि जुल्म और जालिम के खिलाफ लोगों के दिलों और जेहनों में शऊर भी पैदा कर दिया। इमाम हुसैन की मासूम व पाकीजा शख्सियत एक ऐसा मकतब है जो कुर्बानी, सब्र और जानिसारी का सबक सिखाता है।      


जरा कौम को बेदार तो हो लेने दो, हर कौम पुकारेगी हमारे हैं हुसैन

मोहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला माह है। इस माह की दस तारीख यौमे आशुरा को कर्बला में इमाम हुसैन व आपके 72 जानिसार साथियों की तीन दिन की भूख व प्यास के साथ शहादत ने इस्लाम के उसूलों को दुनिया के सामने साबित कर इस पैगाम को दुनिया के सामने जगमगा दिया कि हक का जलाल कभी खत्म नहीं हो सकता।

फूँकों से हक के चिराग को जब भी बुझाने की कोशिश की जाएगी तब-तब अल्लाह वाले हक के चिराग को अपना लहू देकर रोशन करते रहेंगे। शहादते इमाम हुसैन का पहला पैगाम अमली जद्दोजहद का पैगाम है। मोहब्बते हुसैन, तआल्लुक हुसैन और निस्बते हुसैन को रस्मी न रहने दिया जाए बल्कि इसे अमल, हाल और हकीकत में बदल दिया जाए। इसे हकीकी तौर पर अपनाया जाए और पहचान लिया जाए कि यजीदी बद किरदार क्या है और हुसैनी नेक किरदार क्या है।

यजीद इब्ने मुआविया
इब्ने अबू सुफियान
अमीर मुआविया के पुत्र, पिता के आर्थिक एवं राजनीतिक सलाहकार
जन्म : 23 जुलाई 645 ई. (अरब)
मृत्यु : 683 (दमिश्क, सीरिया)
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