मुख्य पृष्ठ > धर्म-संसार > धर्म-दर्शन > इस्लाम धर्म
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
अल्लाह का महीना


अलबत्ता यह जरूर कहा जाता है कि इस दिन अल्लाह के नबी हजरत नूह (अ.) की किश्ती को किनारा मिला था। इसके साथ ही आशूरे के दिन यानी 10 मुहर्रम को एक ऐसी घटना हुई थी, जिसका विश्व इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। इराक स्थित कर्बला में हुई यह घटना दरअसल सत्य के लिए जान न्योछावर कर देने की जिंदा मिसाल है। इस घटना में हजरत मुहम्मद (सल्ल.) के नवासे (नाती) हजरत हुसैन को शहीद कर दिया गया था। आज आशूरा मात्र इसी कांड से जोड़कर देखा जाता है।

कर्बला की घटना अपने आप में बड़ी विभत्स और निंदनीय है। बुजुर्ग कहते हैं कि इसे याद करते हुए भी हमें हजरत मुहम्मद (सल्ल.) का तरीका अपनाना चाहिए। जबकि आज आमजन को दीन की जानकारी न के बराबर है। अल्लाह के रसूल वाले तरीकोंसे लोग वाकिफ नहीं हैं। ऐसे में जरूरत है हजरत मुहम्मद (सल्ल.) की बताई बातों पर गौर करने और उन पर सही ढंग से अमल करने की।

करबला की जं
करबला, इराक की राजधानी बगदाद से 100 किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्व में एक छोटा-सा कस्बा।

10 अक्टूबर 680 (10 मुहर्रम 61 हिजरी) को समाप्त हुई।

इसमें एक तरफ 72 (शिया मत के अनुसार 123 यानी 72 मर्द-औरतें और 51 बच्चे शामिल थे) और दूसरी तरफ 40,000 की सेना थी।

हजरत हुसैन की फौज के कमांडर अब्बास इब्ने अली थे। उधर यजीदी फौज की कमान उमर इब्ने सअद के हाथों में थी।

हुसैन इब्ने अली इब्ने अबी तालिब

हजरत अली और पैगंबर हजरत मुहम्मद की बेटी फातिमा (रजि.) के पुत्र।

जन्म : 8 जनवरी 626 ईस्वी (मदीना, सऊदी अरब) 3 शाबान 4 हिजरी

शहादत : 10 अक्टूबर 680 ई. (करबला, इराक) 10 मुहर्रम 61 हिजरी।
<< 1 | 2 
और भी
हज का तरीका
भारतीय संस्कृति और हज
निजात का सुनहरा अवसर
जुमा का बयान
इस्लाम की पाँच बुनियादी बातें
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम का बयान