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हज का तरीका
एहराम- हज का खास सफेद लिबास पहनना, हज की निय्यत करना और हज की दुआ करना।

मीकात- वह इलाका, जहाँ पहुँचकर हज करने का इहराम बाँधते हैं।

तल्बियह- एहराम बाँधने के बाद से हज खत्म तक उठते-बैठते और हज के अरकान अदा करते वक्त जो दुआ पढ़ते हैं, उस को तल्बियह कहते हैं। तल्बियह यह है- 'ऐ अल्लाह! मैं तेरी पुकार पर तेरे दरबार में हाजिर हूँ। तेरा कोई साझी नहीं है। मैं तेरे दर पर हाजिर हूँ। बेशक, तमाम तारीफें और सारी नेअमतें तेरे लिए हैं। बादशाहत तेरे ही लिए है। तेरा कोई साझी नहीं।'

तहलील- ला इलाह इल्ललाहु मुहम्मर्दुरसूलुल्लाह पढ़ना।

तवाफ- काबा शरीफ के गिर्द चक्कर लगाना।

वुकूफ- अरफात और मुज्दल्फा नामी जगह पर कुछ देर ठहरना।

रमी- जमरा के पास कंकरियाँ मारने को रमी कहते हैं।

तहलीक- सिर के बाल मुँडवाना।

तकसीर- सिर के बाल कटवाना और छोटे कराना।

उमरा- एहराम बाँधकर काबा का तवाफ करना और सफा मरवा नामी पहाड़ियों के बीच दौड़ना/उमरा हज के दिनों के अलावा भी कर सकते हैं।
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