अंदर जाकर देखा कि इमारत में चार खंभे हैं और हर खंभे पर 'बिस्मिल्लाह' लिखा हुआ है और 'बिस्मिल्लाह' की 'मीम' से पानी, अल्लाह की 'ह' से दूध, रहमान की 'मीम' से शराब और रहीम की 'मीम' से शहद जारी है। अंदर से आवाज़ आई- ऐ मेरे महबूब! आपकी उम्मत में से जो शख्स 'बिस्मिल्लाह' प़ढ़ेगा, वह इन चारों का मुस्तहिक़ होगा। (तफ़सीरे नईमी जि. 1, स. 43)
फ़िरऔन ने ख़ुदाई का दावा करने से पहले एक महल बनवाया था और उसके बाहरी दरवाज़े पर 'बिस्मिल्लाह' लिखवाया, लेकिन जब उसने ख़ुदाई का दावा किया तो हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने फ़िरऔन को अल्लाह पर ईमान लाने की दावत दी, उसने क़ुबूल नहीं की तो हज़रत मूसा अल्लैहिस्सलाम ने हलाकत (बर्बादी) की दुआ की।
'ऐ अल्लाह फ़िरऔन को हलाक (बर्बाद) फ़रमा जो बंदा होने के बावजूद मअबूद (खुदा) बना हुआ है। वही आई कि ऐ मूसा फ़िरऔन इस क़ाबिल है कि उसे हलाक कर दिया जाए, लेकिन मैं अपना नाम देख रहा हूँ।
इसी वजह से फ़िरऔन के घर पर अज़ाब नहीं आया। अल्लाह ने उसे वहाँ से निकाल के दरियाए नील में डुबोया। इमाम फ़खरुद्दीन राज़ी फ़रमाते हैं कि जो अपने मकान के बाहिरी दरवाज़े पर 'बिस्मिल्लाह' लिख लिया, वह हलाकत से दुनिया में बेखौफ हो गया। ख्वाह का़फिर की क्यों न हो। (तफसीरे नईमी जि. 1, सं. 43)
हज़रत ईसा अलैहिस्सलान एक क़ब्र से गुज़रे उस कब्र की मय्यत पर बहुत ़सख्त अज़ाब हो रहा था, यह देखकर चंद क़दम आगे तशरीफ़ ले गए और इसतन्जा फ़रमाकर वापिस आए तो देखा कब्र में नूर ही नूर है और वहाँ रहमते इलाही की बारिश हो रही है।
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