रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे व सल्लम ने फ़रमाया कि जो शख्स 'बिस्मिल्लाह' पढ़ता हो तो अल्लाह तआला उसके लिए दस (10) हज़ार नेकियाँ लिखता है और शैतान इस तरह पिघलता है, जैसे आग में रांगा।
हर ज़ीशान (अहम) काम जो 'बिस्मिल्लाह' से शुरू न किया जाए, वह नातमाम (अधूरा) रहेगा और जिसने 'बिस्मिल्लाह' को एक बार पढ़ा, उसके गुनाहों में से एक ज़र्रा भर गुनाह बाक़ी नहीं रहता और फ़रमाया जब तुम वुज़ू करो तो 'बिस्मिल्लाह वलहमदुलिल्लाह' कह लिया करो, क्योंकि जब तक तुम्हारा वुज़ू बाक़ी रहेगा, उस वक्त तक तुम्हारे फ़रिश्ते (यानी किरामन कातिबीन) तुम्हारे लिए बराबर नेकियाँ लिखते रहते हैं।
हज़रत इब्ने अब्बास से रिवायत है रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे व सल्लम ने फ़रमाया की कोई आदमी जब अपनी बीवी के पास आए तो कहे बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम ऐ अल्लाह हमको शैतान से महफूज रख और जो तू मुझे अता फ़रमाए उससे भी शैतान को दूर रख और कोई औलाद हो तो शैतान उसे भी नुकसान नहीं पहुँचा सकेगा (बुख़ारी शरीफ जिल्दे अव्वल सफ़ा 26)।
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे व सल्लम ने शबे मेराज में चार (4) नहरें देखीं, एक पानी की, दूसरी दूध की, तीसरी शराब की और चौथी शहद की। आपने जिब्रीले अमीन से पूछा ये नहरें कहाँ से आ रही हैं, हज़रत जिब्रील ने अर्ज किया, मुझे इसकी ख़बर नहीं। एक दूसरे फ़रिश्ते ने आकर अर्ज़ की कि इन चारों का चश्मा मैं दिखाता हूँ।
एक जगह ले गया, वहाँ एक दरख्त था, जिसके नीचे इमारत (मकान) बनी थी और दरवाज़े पर ताला लगा था और उसके नीचे से चारों नहरें निकल रही थीं। फ़रमाया दरवाज़ा खोलो अर्ज़ की इसकी कुंजी मेरे पास नहीं है, बल्कि आपके पास है। हूज़ुर ने 'बिस्मिल्लाह' पढ़कर ताले को हाथ लगाया, दरवाज़ा खुल गया।
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