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भारतीय दर्शन और योग
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-प्रभुदयाल मिश्र
भारतीय ऋषियों ने जगत के रहस्य को 6 कोणों से समझने की कोशिश की है। वे जानते थे कि मानव की सबसे बड़ी इच्छा दु:ख से छुटकारा है। वे इसके प्रति भी आश्वस्त थे कि इन सिद्धांतों के जरिए उन्होंने इसका निदान खोज लिया है। आइए देखें, ये दार्शनिक सिद्धांत क्या हैं और उनके प्रणेता कौन-कौन हैं--

न्याय : तर्क प्रधान इस प्रत्यक्ष विज्ञान की शुरुआत करने वाले अक्षपाद गौतम हैं। यहाँ न्याय से मतलब उस प्रक्रिया से है जिससे मनुष्य किसी नतीजे पर पहुँच सके - नीयते अनेन इति न्यायः।

प्रत्येक ज्ञान के लिए चार चीजों का होना आवश्यक है -

1. प्रमाता अर्थात्‌ ज्ञान प्राप्त करने वाला। 2. प्रमेय अर्थात्‌ जिसका ज्ञान प्राप्त करना अभीष्ट है। 3. ज्ञान और 4. प्रमाण अर्थात ज्ञान प्राप्त करने का साधन।

वैशेषिक दर्शन : महर्षि कणाद ने इस दार्शनिक मत द्वारा ऐसे धर्म की प्रतिष्ठा का ध्येय रखा है जो भौतिक जीवन को बेहतर बनाए और लोकोत्तर जीवन में मोक्ष का साधन हो।

'यतोम्युदय निश्रेयस सिद्धि: स धर्मः'

न्याय दर्शन जहाँ अंतर्जगत और ज्ञान की मीमांसा को प्रधानता देता है, वहीं वैशेषिक दर्शन बाह्य जगत की विस्तृत समीक्षा करता है। इसमें आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार करते हुए इसे अजर, अमर और अविकारी माना गया है।

न्याय और वैशेषिक दोनों ही दर्शन परमाणु से संसार की शुरुआत मानते हैं। इनके अनुसार सृष्टि रचना में परमाणु उपादान कारण और ईश्वर निमित्त कारण है। इसके अनुसार जीवात्मा विभु और नित्य है तथा दुःखों का खत्म होना ही मोक्ष है।

समस्त वस्तुओं को कुल सात पदार्थों के अंतर्गत माना गया है -

1. द्रव्य, 2. गुण, 3. कर्म, 4. सामान्य, 5. विशेष, 6. समवाय, 7. अभाव।

मीमांसा : वेद के मुख्य दो भाग हैं - कर्मकांड और वेदांत। संहिता और ब्राह्मण में कर्मकांड का प्रतिपादन किया गया है तथा उपनिषद् एवं आरण्यक में ज्ञान का। मीमांसा दर्शन के आद्याचार्य जैमिनी ने इस कर्मकाण्ड को सिद्धांतबद्ध किया है।

इस दार्शनिक मत के अनुसार प्रतिपादित कर्मों द्वारा ही मनुष्य अभीष्ट प्राप्त कर सकता है। इसके अनुसार कर्म तीन प्रकार के हैं - काम्य, निषिद्ध और नित्य। वास्तव में बिना कर्म के ईश्वर भी फल देने में समर्थ नहीं है।

मीमांसा दर्शन ईश्वर की सत्ता को स्वीकार करते हुए बहुदेववादी है। इसमें यज्ञादि कर्मों के परिणाम के लिए एक अदृश्य शक्ति की कल्पना की गई है, जो मनुष्य को शुभ और अशुभ फल देती है।
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