- धर्मप्रांतीय या अधर्मसंघीय पुरोहित वर्ग से हम समझते हैं कि वे पुरोहित जो ब्रह्मचर्य का व्रत लेते हैं, विवाह नहीं करना।
आज्ञाकारिता का व्रत- उस धर्माध्यक्ष से जहाँ वे काम करते हैं। उन्हें व्यक्तिगत संपत्ति रखने का अधिकार है।
- धर्मसंघीय पुरोहित वर्ग से हमारा तात्पर्य है- वे पुरोहित जो धर्मसंघ या समाज के होते हैं, जो कलीसिया में, प्रत्येक अपनी विशेष कार्य प्रणाली के द्वारा भिन्न होते हैं।
वे तीन व्रत लेते हैं- ब्रह्मचर्य- विवाह नहीं करना। निर्धनता- कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं रखना। आज्ञाकारिता- अपने संग के सब अधिकारियों के अधीन रहना।
- धर्मसंघीय धर्म भाई और धर्म बहनें- वे स्त्री और पुरुष हैं, जिन्होंने तीन व्रतों द्वारा अपने धर्म समाज में रहकर अपना जीवन ईश्वर को समर्पित कर दिया है।
वे प्रार्थनामय जीवन, अच्छे उदाहरणों, त्याग के जीवन और अपने अधिकारियों द्वारा सौंपे गए विभिन्न कामों को अपने व्यक्तिगत प्रयत्नों के योगदान से पवित्र माँ कलीसिया की सहायता करते हैं।
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