फिर भी, ये तीन विभिन्नताएँ हैं- - क्रूस पर, येसु ने अपना खून बहाया, ख्रीस्तयाग में ऐसा नहीं होता। - क्रूस पर उसने स्वयं को, स्वर्गीय पिता को, प्रत्यक्ष अर्पित किया, जबकि वेदी पर, वह स्वयं को अपने प्रतिनिधि-पुरोहित द्वारा अर्पित करता है। - क्रूस पर येसु ने हमारे लिए सब कृपाएँ अर्जित की, ख्रीस्तयाग में इन सभी अर्जित कृपाओं को वह हमें प्रदान करता है।
यह याद रखने योग्य है कि पुरोहित 'मेरा बलिदान और तुम्हारा बलिदान' कहता है और निरंतर प्रार्थना करते हुए ईश्वर के पूरे परिवार के नाम पर चढ़ाता है, इसलिए हमें इस उपासना विधि में पूर्णतया सचेतन और सक्रिय भाग लेना चाहिए, जो कि संपूर्ण ख्रीस्तीय कलीसिया के प्रति पवित्र और भव्य धर्म क्रिया है।
ख्रीस्तयाग पूजन पद्धति का श्रेष्ठतम समारोह है। यह कलीसिया की प्रार्थना है। यह हमारे साथ प्रार्थना करती हुई स्वयं येसु की प्रार्थना है। ख्रीस्तयाग में उपस्थित, साथ ही वे जो जीवित और मृत हैं ख्रीस्तयाग के पुण्यफलों के भागीदार होते हैं। यह पृथ्वी, शोधकाग्नि और स्वर्ग की सार्वभौमिक कलीसिया है, जो प्रभु के वेदी के चारों ओर ईश्वर को अपनी भक्ति की श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एकत्र करता है।
ख्रीस्तयाग का समझदारी से अनुसरण करने का अर्थ है, ख्रीस्तयाग के भागों को जानना और उनको आत्मसात करना।
ख्रीस्तयाग और उसके भागों का संक्षिप्त उल्लेख-
प्रवेश गान- ख्रीस्तयाग समारोह की तैयारी कराता है। प्रभु दया कर- यह प्रार्थना प्रभु येसु ख्रीस्त से दया की याचना है।
उच्च स्वर्ग में ईश्वर की महिमा- यह पवित्र तृत्व के तीन दिव्यजनों के आनंद का गीत है।
प्रार्थना- जिसमें, पुरोहित हमारी आवश्यकताओं एवं इच्छाओं को ईश्वर के सम्मुख रखते हैं, अपने पुत्र प्रभु येसु ख्रीस्त और हमारे मध्यस्थ के नाम से उन सभी आवश्यकताओं एवं इच्छाओं को हमें देने की याचना करते हैं।
1. सुसमाचार की पूजन विधि-
पहला पाठ- इसे सुनकर और हमारे जीवन में अपनाकर, हम ईश्वर की मित्रता की ओर अग्रसर होते हैं।
मनन भजन- पहले पाठ के संदेश के लिए हमारा धन्यवाद का गीत और सुसमाचार को सुनने की तैयारी है।
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