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प्रथम संस्कार : स्नान संस्कार
इतना सब के बावजूद, बपतिस्मा के समय ख्रीस्तीय नाम क्यों दिया जाता है? यह इसलिए कि हम बपतिस्मा वालों को कलीसिया, संत की देखभाल और सुरक्षा में रखना चाहती है, जिससे कि उनका एक खास मित्र स्वर्ग में हो जो हमारे लिए प्रार्थना करे और हमारी देखभाल करे।

एक नाम भी ख्रीस्त का साक्ष्य देता है, इसलिए उनके लिए इतनी शर्म क्यों।

अपने बपतिस्मा के नाम पर गर्व करो... तुम्हारे संरक्षक संत के सद्गुणों पर चलो... और उससे सलाह एवं आशीष माँगो।

रोमन साम्राज्य के पतन के बाद, सिकामोरी का एक खूँखार नवयुवक, मूर्ति पूजक सेनानायक ने, सभी प्रतिद्वंद्वियों को हराकर सभी फ्रैंकों को एक राज्य में मिला दिया। तब एक बरगंडी की राजकुमारी क्लोटिल्दा की सुंदरता सुन उसने अपने मित्र आउरेलियन के हाथ संदेश एवं सोने की अँगूठी भेजी। बहुत पत्र व्यवहारों एवं संदेशों के पश्चात सन्‌ 43 में उनकी शादी हो गई।

शादी के एक वर्ष बाद एक बालक ने जन्म लिया। क्लोटिल्दा उसे एक ख्रीस्तीय बनाने के लिए बपतिस्मा दिलाना चाहती थी। महान धार्मिक विधि-समारोह में उसे बपतिस्मा दिया गया, इसके बाद क्लोटिल्दा राजा पर प्रभाव डालना चाहती थी। इसके थोड़े ही समय बाद वह लड़का मर गया। क्लोविस ने अपनी पत्नी पर दोष लगाया। 'मेरे ईश्वर नाराज हैं, क्योंकि तुमने उसे बपतिस्मा दिया और तुम्हारा ईश्वर उसे बचा न सका।'

परन्तु क्लोटिल्दा ने जवाब दिया, 'मैं अपने पुत्र को प्यार करती थी और जानती हूँ कि उसके बपतिस्मा के बाद वह ईश्वर की उपस्थिति में प्रसन्न है। मैं ईश्वर को धन्यवाद देती हूँ कि मेरा पुत्र स्वर्ग में है।'

क्लोविस पत्नी से प्यार करता था और जब उसे दूसरा पुत्र हुआ तो उसने उसे अपनी पत्नी की इच्छा पर छोड़ दिया। उसे भी बपतिस्मा दिया गया। यह बच्चा भयंकर बीमार पड़ा और क्लोविस ने सारा दोष ख्रीस्तीय ईश्वर पर डाला, परन्तु क्लोटिल्दा रात-दिन प्रार्थना करती गई और बालक चंगा हो गया।

इसके तुरंत बाद क्लोविस को जर्मन जाति, अलेमानी के साथ युद्ध लड़ना पड़ा। उसके सैनिक हारते गए और परिस्थिति बड़ी ही नाजुक हो गई। उसने प्रार्थना की 'हे क्लोटिल्दा के ईश्वर, मुझे विजय दो और मैं तुमसे यह प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं बपतिस्मा लूँगा।' कुछ दिनों के युद्ध के पश्चात बाजी पलट गई और उसके सैनिकों ने अलेमानियों को परास्त कर दिया।

क्लोविस ने अपनी प्रतिज्ञा पूर्ण की और उसकी पत्नी क्लोटिल्दा ने प्रशिक्षण में उसकी सहायता की। जब उसने हमारे प्रभु येसु ख्रीस्त के क्रूस पर ठोंके जाने की बात सुनी तो चिल्ला उठा, 'ओह! यदि मैं अपने फ्रेंकों के साथ वहाँ होता।'

उसने अपने युद्ध के साथियों को इस विषय में कहा और उसके साथ बहुत से लोग ख्रीस्तीय बनने को तैयार हो गए।

और तब 496 के ख्रीस्त जयंती पर्व पर रेम्स के पास, उसके साथ तीन हजार व्यक्तियों ने बपतिस्मा लिया। पवित्र बिशप संत रेमी राजा और उसकी प्रजा को हारों से सजी गलियों से गिरजाघर में ले जाया गया।

स्नान संस्कार प्राप्त करने के बाद राजा क्लोविस ने सभी युद्ध बंदियों को मुक्त कर दिया, जिन्हें वह पिछले युद्ध में ले आया था।

वह अपनी बाकी जिंदगी विश्वासी काथलिक बना रहा। कलीसिया की रक्षा करता रहा और उसके विकास कार्यों में मदद करता रहा। उसके शासनकाल में ही फ्रांस का उदय हुआ।
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