-डॉ. के.पी. पोथन पवित्र शास्त्र बाईबल में ईसा मसीह के लिए कई नामों का प्रयोग किया गया है, उनमें से एक है, शांति का राजकुमार।
ईसा मसीह के जन्म के करीब एक हजार वर्ष पूर्व यश्य्याह भविष्य-वक्ता ने बताया था- हमारे लिए एक बालक उत्पन्न होगा, हमें एक पुत्र दिया जाएगा, प्रभुता उसके कंधे पर होगी और उसका नाम अद्भुत युक्ति करने वाला पराक्रमी परमेश्वर और शांति का राजकुमार रखा जाएगा। (यश्य्याह, 9:6 बाईबल)
ईसाई धर्म की उत्पत्ति करीब 2000 वर्ष पूर्व ईसा मसीह द्वारा की गई। ईसा मसीह ने 12 शिष्यों के एक छोटे से झुंड का चयन किया था, जो अलग-अलग पृष्ठभूमि के थे। यही लोग ईसाई कहलाए व इनके वंशज भी। ईसा मसीह शांति, प्रेम, बलिदान एवं निःस्वार्थ सेवा वाले परमेश्वर के राज्य को स्थापित करने आए थे।
ईसा मसीह के उपदेश का सारांश पहाड़ी उपदेश में पाया जाता है, जो मत्ती रचित सु-समाचार के पाँचवें, छठे और सातवें अध्यायों में लिखा गया है। इसके अनुसार धन्य हैं वे जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे। धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं, क्योंकि वे तृप्त किए जाएँगे।
धन्य हैं वे जो दयावान हैं, क्योंकि उन पर दया की जाएगी। धन्य हैं वे जिनके मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे एवं धन्य हैं वे जो मेल कराने वाले हैं क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएँगे। (मत्ती अध्याय 5)
ईश्वर प्रेम है। ईश्वर के महान प्रेम जगत को दर्शाने के लिए ही प्रभु यीशु मनुष्य के रूप में पृथ्वी पर आए। यूहन्ना लिखते हैं- 'परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा है कि उसने अपना इकलौता पुत्र हमें दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे उसका नाश न होगा बल्कि वह अनंत जीवन पाए। (यूहन्ना 3:16)
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