'इसलिए चिंता न करो कि हम क्या खाएँ, क्या पिएँ अथवा क्या पहनें? गैर यहूदी इन सबकी धुन में लगे रहते हैं। तुम्हारा स्वर्गीय पिता जानता है कि ये सब वस्तुएँ तुम्हें आवश्यक हैं। तुम पहले ईश्वर के राज्य और उसकी धार्मिकता की खोज करो, तब यह सब तुम्हें यों ही मिल जाएगा।'
'कल की चिंता मत करो, कल अपनी चिंता आप कर लेगा। आज के लिए आज ही का झमेला बहुत है।' (मत्ती 6:25-34) हमेशा ईश्वर पर भरोसा रखो- जब हम पवित्र त्रित्व के विषय में बोलते हैं, तो हम प्रत्येक दिव्य पुरुष (जन) को एक विशेष गुण (कार्य) सौंपते हैं- उदाहरण के लिए पिता ईश्वर को हम सृष्टिकर्ता, पुत्र ईश्वर को मुक्तिदाता और पवित्रात्मा को पवित्र करने वाला मानते हैं। यद्यपि तीनों दिव्यजनों का एक ही स्वभाव है, समस्त कार्य और सिद्धता तीनों जनों के लिए समान है।
हम इन सबमें इसलिए विश्वास करते हैं कि ईश्वर ने यह सब हम पर प्रकट किया, जब उसने कहा, 'इसलिए समस्त पृथ्वी पर जाओ और सबों को मेरे शिष्य बनाओ और उन्हें पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम में बपतिस्मा दो।'(मत्ती 28:19)
और फिर, 'पर वह सहायक, वह पवित्रात्मा जिसे मेरे पिता मेरे नाम में भेजेंगे, तुम्हें सब कुछ सिखलाएगा और मैंने जो कुछ तुमसे कहा, उसका स्मरण तुम्हें दिलाएगा।' (योहन 14:26)
और संत पौलुस कुरिंथियो को लिखते समय अपने पत्र का अंत इस तरह करते हैं- हमारे पुत्र येसु ख्रीस्त की कृपा, ईश्वर का प्यार और पवित्रात्मा का साहचर्य आप लोगों के साथ हो।' (2 कुरि. 3:18)
यह हमेशा स्मरण करने योग्य है कि हममें से प्रत्येक को त्रियेक परमेश्वर ने बनाया है। वह हमें जीवित रखता, हम सबों को प्यार करता है। हमारे स्वर्ग में पहुँचने की कामना करता है।
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