सुलतानगंज से देवघर की दूरी 98 किलोमीटर है। इसमें सुइया पहाड़ जैसे दुर्गम रास्ते भी शामिल हैं, जहाँ से नंगे पाँव गुजरने पर नुकीले पत्थर पाँव में चुभते हैं मगर मतवाले शिवभक्तों को इसकी परवाह कहाँ रहती है। धर्मशास्त्रों में शिव के जिस अलमस्त व्यक्तित्व का वर्णन है, कमोवेश उनके भक्त कांवड़ियों में भी श्रावणी मेले में यह नजर आता है। वैसे हठयोगी शिवभक्तों की भी कमी नहीं है।
इतनी लंबी दूरी तक दंड प्रणाम करते पहुँचने वाले शिवभक्तों की कमी नहीं है। वहीं एक ही दिन में इस यात्रा को पूर्ण करने वाले भी हजारों में हैं। देवघर के धार्मिक पर्यटन के लिए उमड़ रहे सैलाब पर अब बिहार सरकार की भी नजर पड़ी है। राज्य सरकार ने इस वर्ष कांवड़ियों के लिए कच्ची सड़क का निर्माण प्रारंभ कराया है।
इसके पूरा हो जाने से जहाँ सुलतानगंज से देवघर की दूरी 17 किलोमीटर कम हो जाएगी, वहीं नंगे पाँव पैदल यात्रा भी सुगम होगी। वैसे यह विडंबना ही है कि जिस धार्मिक मेले से करोड़ों की आमदनी विभिन्न औद्योगिक घराने करते हैं, वे कांवरिया पथ में सुविधाएँ मुहैया कराने पर पाँच पैसे भी खर्च नहीं करते।
श्रावणी मेले में इधर के कुछ वर्षों में बड़ी तब्दीलियाँ आई हैं। बीस वर्ष पहले तक कांवड़ लेकर पदयात्रा करने वालों में मध्य आयु वर्ग के पुरुषों की संख्या ज्यादा होती थी लेकिन अब ऐसी बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं और नौजवानों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। धार्मिक आस्था और गहरी होने के अलावा इसमें एक अलग तरह के पर्यटन का आनंद भी है।
घर-परिवार और इलाके से इतर प्राकृतिक सुंदरता से लैस रास्तों में चार-पाँच दिन पैदल चलने पर नौजवानों को पिकनिक का मजा भी मिल जाता है तो कुछ साहसपूर्ण करने की अनुभूति भी मिलती है। महिलाएँ जिस तरह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं, उसी अनुपात में उनमें धर्म-कर्म के प्रति भी चेतना पैदा हुई है। अगर पुरुष शिव के दरबार में अपनी मन्नतें माँगने पहुँच सकते हैं तो औरतें क्यों नहीं?
वैसे भक्तों की भीड़ में मनचले युवकों के शामिल होने से अराजकता की स्थिति भी पैदा होने लगी है। इसके अलावा सुलतानगंज से देवघर तक भीड़ बढ़ने के कारण उसके संचालन की चुनौतियाँ बढ़ती जा रही हैं। देवघर में श्रावणी मेले के दौरान कांवड़ियों की सात से आठ किलोमीटर लंबी कतार लग जाती है। घंटों खड़ा रहने के बाद कुछ पल के लिए मंदिर में प्रवेश मिलता है। बहरहाल, श्रावणी मेले की तैयारी गई है और शिवभक्त इसकी योजना बनाने में जुट गए हैं।
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