- प्रस्तुति : साध्वीश्री डॉ. कुंदनरेखाजी प्रेक्षाध्यान : यह मानव मन की पी़ड़ा को दूर करने का विज्ञान है। तनाव एवं डिप्रेशन के युग में प्रेक्षाध्यान जैसे अवदान को प्राप्त कर इंसान ने सुख की साँस ली थी। अध्यात्म शिखर पर प्रतिष्ठित एक अलौकिक शक्ति का नाम है आचार्य तुलसी, जिन्होंने मात्र 11 वर्ष की उम्र में आत्मकल्याण के साथ जनकल्याण का संकल्प लिया। मानवता के मसीहा गुरुदेव तुलसी ने लगभग 70 वर्ष तक संयम और त्याग का जीवन जिया और उसके महत्व को उजागर किया। भौतिकता से लिपटे विश्व की मुर्च्छा को दूर करने हेतु आध्यात्मिक संजीवनी बूटी दे कृतार्थ किया। दिवा स्वप्नदृष्टा गणाधिपति तुलसी का संपूर्ण जीवन महान अवदानों का प्रदाता रहा। अनैतिकता, भ्रष्टाचार, हिंसा एवं आतंक जैसी विषमताओं को दूर करने हेतु उनके अवदान वरदान बने।अणुव्रत : भारत की बाह्य स्वतंत्रता को अभिशाप बनने से बचाने के लिए गुरुदेव तुलसी ने 'अणुव्रत आंदोलन' का सिंहनाद किया। यह समाज सुधार का सशक्त माध्यम है। इसकी गूँज राष्ट्रपति भवन से लेकर गरीब की झोप़ड़ी तक पहुँची। वर्ण, जाति, लिंगभेद से ऊपर यह असाम्प्रदायिक धर्म है।जीवन-विज्ञान : यह सही जीवन जीने का विज्ञान है। अमन से जीने का अद्भुत अवदान है। देश के उज्ज्वल भविष्य के निर्माता गुरुदेव तुलसी ने जीवन विज्ञान जैसा अवदान देकर नवनिर्माण की अहम भूमिका प्रस्तुत की। अनमोल गुणों के संप्रेषक गुरुदेव ने नैतिक उत्थान में अपने जीवन के अमूल्य क्षणों को सर्जा। यही कारण था कि भारत सरकार ने उन्हें इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार से नवाजा और राजस्थान यूनिवर्सिटी ने उन्हें 'भारत ज्योति' कहा। गुरुदेव तुलसी इस धरा पर शरीर से चाहे अदृश्य हो गए हों, उनके अवदान अमर हैं, जो मानवता का मार्ग प्रशस्त करते रहेंगे। |